किसकी सेटिंग से धरती का सीना चीर रहे अवैध बोरवेल

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पानी बचाओ केवल नारों तक सीमित — भाग 2

आखिर किसकी सेटिंग से धरती का सीना चीर रहे अवैध बोरवेल, विभागीय चुप्पी पर उठ रहे सवाल

यमुना टाइम्स ब्यूरो

यमुनानगर (राकेश भारतीय )एक तरफ सरकार “पानी बचाओ” के बड़े-बड़े अभियान चला रही है, दूसरी तरफ यमुनानगर में भूजल दोहन का खेल खुलेआम जारी है। शहर के कई क्षेत्रों में घरों के भीतर ही नहीं बल्कि सार्वजनिक गलियों, सड़कों और सरकारी जमीन तक को खोदकर अवैध बोरवेल और सबमर्सिबल लगाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर यह सब किसकी शह पर हो रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ विभागीय कर्मचारी और गैर-लाइसेंसी प्लंबर पैसों के दम पर नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। हालत यह है कि पहले बिना अनुमति गली तोड़ी जाती है, फिर बोरिंग मशीन पहुंचती है और देखते ही देखते धरती का सीना चीरकर पानी खींचने का इंतजाम कर दिया जाता है।
“लाइन टूटे तो टूटे, बस मोटर लगनी चाहिए”
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई जगह बोरिंग के दौरान सीवरेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन तक क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। सरकारी गलियों को तोड़कर निजी उपयोग के लिए पानी खींचा जा रहा है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
नियम किताबों में, जमीन पर ‘सेटिंग’ का खेल?
जानकार बताते हैं कि बिना अनुमति बोरवेल करवाना नियमों के खिलाफ है। यहां तक कि ऐसे मामलों में संबंधित प्लंबर का सामान जब्त करने तक के प्रावधान बताए जाते हैं। बावजूद इसके कुछ गैर-लाइसेंसी प्लंबर धड़ल्ले से यह काम कर रहे हैं।


लोगों का आरोप है कि जब कोई जागरूक नागरिक विरोध करता है तो बाद में “अनुमति” का कागज दिखाकर मामला शांत कराने की कोशिश होती है। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?
भूजल संकट की ओर बढ़ता शहर
यमुनानगर पहले ही गिरते भूजल स्तर की चुनौती झेल रहा है। ऐसे में अनियंत्रित और अवैध सबमर्सिबल आने वाले समय में बड़े जल संकट का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञ बार-बार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि इसी तरह धरती से पानी खींचा जाता रहा तो आने वाली पीढ़ियों के हिस्से में प्यास ही बचेगी।
आखिर जिम्मेदार कौन?
क्या विभाग को यह अवैध बोरवेल दिखाई नहीं देते?
क्या सार्वजनिक गलियों में खुदाई की अनुमति दी गई है?
गैर-लाइसेंसी प्लंबरों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या “पानी बचाओ” सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित है?
यदि समय रहते सख्ती नहीं हुई तो वह दिन दूर नहीं जब शहर की गलियों में मोटरें तो चलेंगी, लेकिन धरती के नीचे पानी नहीं बचेगा।

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