शूटरों तक पहुंची पुलिस की जांच! रोहतक-सोनीपत में छिपे हैं हत्या के कथित मास्टर एक्जीक्यूटर?
कुरुक्षेत्र से चली कड़ी अब रोहतक और सोनीपत तक पहुंची… काला राणा गिरोह से कथित कनेक्शन ने बढ़ाया सस्पेंस
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर (राकेश भारतीय) हरभजन सिंह उर्फ याद्दी हत्याकांड की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है, जहां पुलिस के हाथ उन दो चेहरों तक पहुंचने का दावा सामने आया है, जिन पर हत्या को अंजाम देने वाले मुख्य शूटर होने का संदेह है। सामने आई जानकारी के मुताबिक दोनों के रोहतक और सोनीपत से जुड़े होने की बात कही जा रही है और उनके तार कथित तौर पर काला राणा गिरोह से जुड़े होने की जांच की जा रही है। हालांकि दोनों अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं।
3 सितंबर को मॉडल टाउन में जिम से बाहर निकलते समय हरभजन सिंह की हत्या ने पूरे जिले को हिला दिया था। शुरुआत में जांच CCTV, बाइक और हमलावरों की पहचान तक सीमित नजर आ रही थी, लेकिन धीरे-धीरे कुरुक्षेत्र कनेक्शन, संभावित ठहरने की व्यवस्था, GPS और मददगारों की भूमिका जैसे कई नए एंगल सामने आए। अब जांच का दायरा हरियाणा के दूसरे जिलों तक फैलता दिखाई दे रहा है।

कुरुक्षेत्र से रोहतक-सोनीपत तक कैसे जुड़ी कड़ी?
इस केस की सबसे दिलचस्प बात यही है कि पुलिस जिस नेटवर्क को खंगाल रही है, उसकी कड़ियां अलग-अलग स्थानों से जुड़ती दिखाई दे रही हैं।
पहले वारदात में इस्तेमाल बाइक का कनेक्शन कुरुक्षेत्र से सामने आया। इसके बाद कथित मददगारों की गिरफ्तारी हुई। अब सामने आई जानकारी में मुख्य शूटरों के रोहतक और सोनीपत से जुड़े होने की बात कही जा रही है।
यानी जांच की तस्वीर कुछ इस तरह बनती नजर आ रही है—
कुरुक्षेत्र → बाइक/लॉजिस्टिक मदद → स्थानीय मददगार → शूटरों की पहचान → रोहतक-सोनीपत कनेक्शन
लेकिन इस पूरी कड़ी का अंतिम सच पुलिस की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही सामने आएगा।
काला राणा कनेक्शन—सिर्फ दावा या जांच का अहम हिस्सा?
सबसे संवेदनशील एंगल कथित तौर पर मुख्य शूटरों के काला राणा गिरोह से जुड़े होने का है। अभी इसे पुलिस की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। यदि जांच में यह कनेक्शन प्रमाणित होता है तो याद्दी हत्याकांड की कहानी स्थानीय रंजिश से निकलकर अंतर-जिला आपराधिक नेटवर्क तक पहुंच सकती है।
यही वह बिंदु है जहां पुलिस की आगे की कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी।
STF और CIA की सक्रियता बढ़ी
मुख्य शूटरों की गिरफ्तारी के लिए STF अंबाला यूनिट और CIA की टीमों की कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। यानी अब जांच सिर्फ एक स्थानीय थाना स्तर की कार्रवाई नहीं रह गई है, बल्कि अलग-अलग पुलिस इकाइयां संभावित ठिकानों और संपर्कों को खंगाल रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
क्या पुलिस मुख्य शूटरों को गिरफ्तार कर पाएगी?
और उससे भी बड़ा सवाल—
अगर ये वही लोग हैं जिन्होंने गोलियां चलाईं, तो उन्हें हरभजन सिंह की गतिविधियों, जिम के समय और वारदात के लिए जरूरी जानकारी किसने दी?
GPS वाला एंगल और भी महत्वपूर्ण
जांच में हरभजन सिंह की कार में GPS लगाए जाने का एंगल पहले ही सामने आ चुका है। अगर पुलिस इस कड़ी को प्रमाणित कर लेती है तो यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि वारदात से पहले उनकी गतिविधियों पर किस तरह नजर रखी जा रही थी।
यही कारण है कि अब पुलिस की जांच सिर्फ ‘किसने गोली चलाई’ से आगे बढ़कर ‘किसने पूरी जानकारी उपलब्ध कराई’ तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
याद्दी हत्याकांड: अब अगली गिरफ्तारी किसकी?
एक तरफ पुलिस के हाथ कथित मददगारों तक पहुंच चुके हैं, दूसरी तरफ मुख्य शूटरों की पहचान से जुड़ी जानकारी सामने आ रही है। यदि रोहतक और सोनीपत से जुड़े दोनों संदिग्ध पुलिस की गिरफ्त में आते हैं, तो संभव है कि पूछताछ में हथियार, बाइक, GPS, ठिकाने और हत्या की पूरी प्लानिंग से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलें।

फिलहाल कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है—
याद्दी तक पहुंचने वाले शूटरों के पीछे कौन था?
और क्या गिरफ्तार किए गए मददगारों तथा कथित मुख्य शूटरों की कड़ियां एक ही नेटवर्क तक जाती हैं?
यमुना टाइम्स इस हत्याकांड की हर महत्वपूर्ण कड़ी पर नजर बनाए हुए है।
नोट: मुख्य शूटरों की पहचान और काला राणा गिरोह से कथित संबंध संबंधी बातें उपलब्ध रिपोर्ट/सूत्रों पर आधारित हैं। पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और गिरफ्तारी के बाद ही इन्हें अंतिम तथ्य माना जाएगा।












