याद्दी हत्याकांड में खुलने लगी साजिश की परतें!

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याद्दी हत्याकांड में खुलने लगी साजिश की परतें!
चार गिरफ्तारियां… कुरुक्षेत्र कनेक्शन… कार में GPS और शूटरों के ठहरने की कड़ी ने बढ़ाई पुलिस की जांच
मुठभेड़ में दो संदिग्धों के पैर में लगी गोली, अब पुलिस की नजर ‘शूटरों तक पहुंचाने वाली कड़ी’ पर
यमुना टाइम्स एक्सक्लूसिव
 यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर ( राकेश भारतीय) मॉडल टाउन में फाइनेंसर एवं ट्रांसपोर्ट कारोबारी हरभजन सिंह उर्फ याद्दी की हत्या के बाद से जिस सवाल ने पूरे यमुनानगर को बेचैन कर रखा था—आखिर शूटर कौन थे और उन्हें किसने मदद पहुंचाई?—उसका जवाब तलाशते हुए पुलिस अब उस नेटवर्क की कड़ियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है, जिसने कथित तौर पर शूटरों को साधन, ठिकाना और टारगेट की गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराने में मदद की हो सकती है।
3 सितंबर को जिम से बाहर निकलते समय हरभजन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग टीमों को जांच में लगाया। अब इस केस में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ताजा कार्रवाई में कुरुक्षेत्र निवासी राकेश और आर्यन को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। दोनों के पैर में गोली लगी और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सबसे बड़ा सवाल—शूटरों तक कैसे पहुंची ‘मदद’?
पुलिस की जांच अब केवल उस बाइक या सीसीटीवी फुटेज तक सीमित नहीं दिखाई दे रही, बल्कि उन लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है जिन्होंने कथित तौर पर मुख्य शूटरों को सहायता उपलब्ध कराई।
ताजा पुलिस कार्रवाई में पकड़े गए राकेश और आर्यन पर आरोप है कि उन्होंने शूटरों को हथियार अथवा अन्य सहायता उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। इसी कड़ी में पुलिस अब यह जानने में जुटी है कि हत्या से पहले शूटर कहां रुके, किसके संपर्क में रहे और वारदात के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर किसने मदद पहुंचाई।
कुरुक्षेत्र क्यों बन रहा है जांच का अहम पड़ाव?
पुलिस के सामने इस केस में कुरुक्षेत्र की कड़ी लगातार मजबूत होती नजर आ रही है। पहले हत्या में इस्तेमाल बाइक का संबंध कुरुक्षेत्र से जुड़ने की बात सामने आई और अब गिरफ्तार किए गए संदिग्ध भी कुरुक्षेत्र जिले के बताए जा रहे हैं।
यानी जांच की कड़ियां फिलहाल कुछ इस तरह जुड़ती दिखाई दे रही हैं—
कुरुक्षेत्र → बाइक → संभावित ठहराव → मददगार → शूटर → मॉडल टाउन हत्या
हालांकि इस पूरी कड़ी का अंतिम सत्य पुलिस की पूछताछ और जांच के बाद ही सामने आएगा।
हरभजन की कार में GPS लगाने का एंगल भी सामने आया
इस हत्याकांड की जांच में एक और बेहद अहम एंगल सामने आया है।पुलिस सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, हरभजन सिंह की कार में GPS डिवाइस लगाए जाने की बात सामने आई है, ताकि उनकी लोकेशन पर नजर रखी जा सके। इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए किशन और विशाल की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अगर जांच में यह बात प्रमाणित होती है कि वारदात से पहले हरभजन की गतिविधियों पर तकनीकी तरीके से नजर रखी जा रही थी, तो इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिल सकती है कि शूटरों को हमले का समय और टारगेट की मूवमेंट किस तरह पता चली।
मुठभेड़ के बाद बदली जांच की दिशा
पुलिस और संदिग्धों के बीच मुठभेड़ के बाद राकेश और आर्यन की गिरफ्तारी को इस केस में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।दोनों के घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अब उनके स्वास्थ्य में सुधार के बाद पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि मुख्य शूटरों से उनका संपर्क कब हुआ, हथियार कहां से आया, बाइक किसके जरिए उपलब्ध हुई और कुरुक्षेत्र में ठहरने की व्यवस्था किसने की।
यही पूछताछ संभवतः उस कड़ी तक पहुंचा सकती है जिसे पुलिस अभी मुख्य साजिश या मास्टर कनेक्शन के रूप में तलाश रही है।
गैंगस्टर के नाम से वायरल पोस्ट और ऑडियो पर भी नजर
हरभजन सिंह हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित पोस्ट और बाद में कथित ऑडियो सामने आया था, जिसमें कुछ गैंगस्टरों के नाम से जिम्मेदारी लेने और धमकी देने का दावा किया गया था।
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस ने इन सोशल मीडिया दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन्हें हत्या की जिम्मेदारी का प्रमाण मानना अभी जल्दबाजी होगी। पुलिस इन दावों की सत्यता और उनसे जुड़े डिजिटल स्रोतों की जांच कर रही है।
यमुना टाइम्स की पड़ताल में भी अभी तक ऐसा कोई नया, स्वतंत्र रूप से सत्यापित गैंगस्टर बयान सामने नहीं आया है, जिसे पुराने वायरल पोस्ट या ऑडियो से अलग “नई जिम्मेदारी” के रूप में प्रकाशित किया जा सके।
अब असली कहानी शूटरों से ज्यादा ‘मददगारों’ में छिपी?
याद्दी हत्याकांड की जांच जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, उसमें अब सबसे अहम सवाल यह नहीं रह गया है कि गोली किसने चलाई? बल्कि पुलिस के सामने इससे भी बड़ा सवाल है—शूटरों को यहां तक पहुंचाने वाला कौन था? बाइक किसने उपलब्ध कराई? शूटरों के ठहरने की व्यवस्था किसने की? हथियार कहां से आया? हरभजन की गतिविधियों की जानकारी किसे थी? कार में GPS किस उद्देश्य से लगाया गया? शूटरों को वारदात के समय और स्थान की जानकारी कैसे मिली? और इन सभी कड़ियों के पीछे क्या कोई बड़ा नेटवर्क है? इन सवालों के जवाब ही इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की पूरी तस्वीर साफ कर सकते हैं।
चार गिरफ्तारियां… लेकिन कहानी अभी बाकी है!
हरभजन सिंह की हत्या के मामले में अब किशन, विशाल, राकेश और आर्यन—चार लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आ चुकी है। लेकिन पुलिस की असली चुनौती अभी भी कथित मुख्य शूटरों और पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है। कुरुक्षेत्र से शुरू हुई कड़ी, GPS से निकला नया एंगल और मददगारों की गिरफ्तारी—इन तीनों ने जांच को एक नया मोड़ जरूर दिया है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस की पूछताछ में कौन-सा नाम सामने आता है और क्या इन चार गिरफ्तारियों के जरिए पुलिस गोली चलाने वालों तक पहुंच पाती है।
फिलहाल इतना साफ है—याद्दी हत्याकांड की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि चार गिरफ्तारियों के बाद इसकी सबसे महत्वपूर्ण परतें खुलनी शुरू हुई हैं।
यमुना टाइम्स की विशेष टिप्पणी
सोशल मीडिया पर वायरल किसी पोस्ट, ऑडियो या गैंगस्टर के नाम से किए गए दावे को पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट में आरोपों और जांच से जुड़े बिंदुओं को उपलब्ध पुलिस/मीडिया रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
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