यमुनानगर के ऐतिहासिक लोहगढ़ में 56 साल बाद जलेगी बिजली, रविवार को होगा ऐतिहासिक शुभारंभ

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आज तक हरियाणा का नहीं था स्थाई बिजली कनेक्शन आवश्यकता पड़ने पर हिमाचल से मांगी जाती थी बिजली

यमुनानगर के ऐतिहासिक लोहगढ़ में 56 साल बाद जलेगी बिजली, रविवार को होगा ऐतिहासिक शुभारंभ
 यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर ( राकेश भारतीय) सिख साम्राज्य की पहली राजधानी और हरियाणा की शान कहे जाने वाले ऐतिहासिक लोहगढ़ किले के लिए रविवार का दिन इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। 56 सालों के लंबे इंतजार के बाद पहली बार किले में बिजली की सप्लाई शुरू होगी।
बड़ी विडंबना: हरियाणा के किले को हिमाचल से मांगनी पड़ती थी लाइट
इस बारे में जानकारी देते हुए समाजसेवी कृपाल सिंह ने बताया कि आज तक लोहगढ़ किले में हरियाणा बिजली बोर्ड का कोई स्थाई कनेक्शन ही नहीं था।
किला हरियाणा-हिमाचल बॉर्डर पर स्थित है, इसलिए जब भी यहां कोई धार्मिक कार्यक्रम, मेला या शोध कार्य होता था, तो आयोजकों को मजबूरी में हिमाचल प्रदेश से अस्थाई बिजली की व्यवस्था के लिए कहना पड़ता था। सिखों की पहली राजधानी में आज तक लाइट तक नहीं थी, यह अपने आप में बड़ी विडंबना थी।
अब क्या होगा?
अब इस विडंबना को हरियाणा सरकार खत्म करने जा रही है। रविवार को हरियाणा सरकार द्वारा किले परिसर में जनरेटर की व्यवस्था करके अस्थाई कनेक्शन के रूप में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहला मौका होगा जब लोहगढ़ किला हरियाणा की अपनी रोशनी से जगमगाएगा।
कौन रहेंगे मुख्य अतिथि?
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में साढ़ौरा की स्थानीय विधायक रेनू बाला मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। उनके साथ लोहगढ़ ट्रस्ट के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री कंवरपाल गुर्जर और हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष मुकेश गर्ग विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
क्या है लोहगढ़ का इतिहास?
यमुनानगर के साढ़ौरा से करीब 30 किलोमीटर दूर शिवालिक की पहाड़ियों में बसा लोहगढ़ सिर्फ एक किला नहीं, बल्कि एक पूरा शहर था।
1.  सिख साम्राज्य की पहली राजधानी: छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी के निर्देश पर भाई लखी राय बंजारा ने इसे बनवाना शुरू किया था। 1710 में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने सरहिंद फतह करने के बाद इसे अपनी राजधानी घोषित किया।
2.  7000 एकड़ का महाकिला: कहा जाता है यह 7000 एकड़ में फैला है और इसमें 200 छोटी-छोटी गढ़ियां बनी हुई हैं, जो एक-दूसरे से जुड़ी हैं।
3.  पहली टकसाल: बंदा बहादुर ने यहीं से गुरु नानक देव और गुरु गोविंद सिंह जी के नाम पर सिक्के चलाए थे और यहीं से जमींदारी प्रथा को खत्म करके जमीन किसानों को दी थी।
हरियाणा सरकार अब इस विरासत को सहेजने के लिए 20 एकड़ में भव्य म्यूजियम और स्मारक बना रही है। बिजली पहुंचने के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर को नई पहचान मिलेगी।
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