“पानी बचाओ” सिर्फ नारा? गलियों में धड़ल्ले से लग रहे अवैध बोरवेल सबमर्सिबल!

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“पानी बचाओ” सिर्फ नारा? गलियों में धड़ल्ले से लग रहे अवैध बोरवेल सबमर्सिबल!


यमुना टाइम्स ब्यूरो यमुनानगर( राकेश भारतीय) एक तरफ सरकार भूजल बचाने की अपील कर रही है, दूसरी तरफ शहरों और कस्बों की गलियों में खुलेआम सबमर्सिबल पंप लगाए जा रहे हैं। हालत यह है कि कई लोग अपने घरों के अंदर नहीं बल्कि सरकारी गलियों और सार्वजनिक जमीन पर ही बोरिंग करवा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही?

 


जानकारों के अनुसार नियम साफ कहते हैं कि भूजल दोहन के लिए कई क्षेत्रों में अनुमति आवश्यक होती है। इतना ही नहीं, नियमित पानी कनेक्शन मिलने के बाद मीटर लगाने और तय नियमों के अनुसार पानी उपयोग करने का प्रावधान भी होता है। इसके बावजूद बिना अनुमति के बोरवेल सबमर्सिबल लगवाने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।

“प्लंबर करा रहे सेटिंग, नियम जा रहे किनारे”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्लंबर और ठेकेदार बिना किसी अनुमति की जांच किए सीधे मोटर और पाइप डालकर कनेक्शन दे देते हैं। कई जगह रातों-रात बोरिंग हो जाती है और विभाग को भनक तक नहीं लगती।
लोगों का कहना है कि जब आम नागरिक से पानी का बिल, सीवर शुल्क और मीटर की बात की जाती है तो फिर अवैध बोरवेल सबमर्सिबल पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
भूजल स्तर पर बड़ा खतरा
विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि अनियंत्रित भूजल दोहन से पानी का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड भी कई रिपोर्टों में भूजल संरक्षण की जरूरत बता चुका है।
जनता पूछ रही सवाल
क्या सरकारी गलियों में निजी बोरवेल सबमर्सिबल लगाना वैध है?
क्या इन लोगों ने अनुमति ली है? और यदि अनुमति दी गई है तो क्या अधिकारियों ने निम्न और कायदों को ताप पर रखकर अनुमति दी है?
क्या विभाग जांच करेगा?
क्या पानी बचाने के नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं?

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