चुनाव खत्म, टकराव शुरू – जीत के जश्न से पहले ही भिड़ गए समर्थक, फिर जो हुआ उसने सबकी धड़कनें बढ़ा दीं!

इस खबर को सुनें

*चुनाव खत्म, टकराव शुरू – जीत के जश्न से पहले ही भिड़ गए समर्थक, फिर जो हुआ उसने सबकी धड़कनें बढ़ा दीं!*

यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर:( राकेश भारतीय ) जिस चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से कचहरी परिसर में धड़कनें तेज थीं, चर्चाओं का बाजार गर्म था, समर्थक सुबह से ही अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए पसीना बहा रहे थे… परिणाम आते ही उसी परिसर में माहौल बदल गया।

जी हां, हम बात कर रहे हैं जिला स्तर पर अधिवक्ताओं के संगठन के चुनाव की। मतदान शांतिपूर्ण निपटा, मतगणना पूरी हुई और जैसे ही परिणाम घोषित हुए, जीत का शोर अभी थमा भी नहीं था कि दो अलग-अलग खेमों के समर्थक आमने-सामने आ गए।

बताया जा रहा है कि पहले मामूली कहासुनी से बात शुरू हुई। एक-दूसरे को चुनावी जीत-हार को लेकर ताना मारा गया। देखते ही देखते तू-तड़ाक की भाषा शुरू हो गई। मामला इतना बढ़ा कि संगठन के एक पूर्व बड़े पदाधिकारी और दूसरे खेमे के एक सक्रिय समर्थक एक-दूसरे के गिरेबान तक पहुंच गए।

*और फिर हाथापाई…*

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई। कचहरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सीनियर अधिवक्ताओं ने बीच-बचाव का प्रयास किया, लेकिन तब तक बात और बिगड़ चुकी थी।

सूत्रों की मानें तो इस दौरान दोनों ओर से फायरिंग तक की नौबत आ गई। हालांकि गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन फायरिंग की आवाज से पूरे परिसर में सन्नाटा छा गया।

*सबसे बड़ी बात – मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा*

ये बुद्धिजीवी वर्ग का मामला है, इसलिए दोनों पक्षों ने समझदारी दिखाते हुए मामला पुलिस तक नहीं जाने दिया। आपसी रजामंदी से मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ता मध्यस्थता कर रहे हैं।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब *सोमवार को एक पंचायत / बैठक* रखी गई है, जिसमें दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर सुलह कराने का प्रयास किया जाएगा।

फिलहाल कचहरी परिसर में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। चुनावी रंजिश का ये टकराव अब पंचायत में कैसे सुलझेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

*नोट:* यमुना टाइम्स किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करता। अधिवक्ता समाज एक सम्मानित समाज है और हमें उम्मीद है कि वरिष्ठों की मौजूदगी में मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ जाएगा।

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे