📰 *मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार, भगवद गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं माना जा सकता, बल्कि यह जीवन-मूल्य, दर्शन और नैतिक शिक्षा का स्रोत है।*
*कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गीता और योग का शिक्षण शैक्षणिक उद्देश्य से किया जा सकता है और इसे धार्मिक प्रचार नहीं माना जाएगा।*
*इस फैसले का सीधा मतलब है कि स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में गीता को वैल्यू एजुकेशन के रूप में पढ़ाया जाना कानूनी रूप से गलत नहीं है, बशर्ते किसी पर इसे थोपना न हो।*












