पंचकूला तहसीलदार प्रकरण से अफसरशाही में हड़कंप

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­पंचकूला तहसीलदार प्रकरण से अफसरशाही में हड़कंप

यमुना टाइम्स ब्यूरो
पंचकूला ( राकेश भारतीय ) हरियाणा में भ्रष्टाचार को लेकर सरकार का रुख हाल के दिनों में पहले से अधिक सख्त नजर आने लगा है। ताजा मामला पंचकूला के रायपुर रानी तहसील से जुड़ा है, जहां तहसीलदार विक्रम सिंगला को निलंबित कर दिया गया है और वे फिलहाल एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की रिमांड पर हैं।
आरोप है कि तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री कर दी। इतना ही नहीं, रजिस्ट्री के लिए उपयोग में लाए गए पत्र पर SDM के फर्जी हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई है। SDM की ओर से स्पष्ट किया गया कि संबंधित दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
ACB की कार्रवाई, जांच का दायरा बढ़ा
मामले की गंभीरता को देखते हुए ACB ने तहसीलदार को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें दो दिन की रिमांड पर भेजा गया है। जांच एजेंसी को शक है कि यह मामला केवल एक रजिस्ट्री तक सीमित नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी और मिलीभगत का हो सकता है।

 

 

 

राजनीतिक संदेश या सिस्टमकी  सफाई?

पंचकूला प्रकरण ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में अलग-अलग जिलों में अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत, फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई हो रही है। सत्तारूढ़ दल इसे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का परिणाम बता रहा है।
वहीं विपक्ष का कहना है कि कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी जब राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अधिकारियों और बड़े नामों तक जांच पहुंचेगी। विपक्ष के अनुसार केवल निचले स्तर के अफसरों पर कार्रवाई से सिस्टम की बीमारी खत्म नहीं होगी।

बॉक्स –बड़ा सवाल
क्या पंचकूला का यह मामला प्रशासनिक तंत्र में सुधार की शुरुआत है,
या फिर यह कार्रवाई सिर्फ एक उदाहरण बनकर रह जाएगी?
फिलहाल इतना तय है कि तहसीलदार प्रकरण ने पूरे राजस्व विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में जांच के और खुलासे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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