UGC कानून के विरोध में यमुनानगर में सवर्ण समाज लामबंद

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UGC कानून के विरोध में यमुनानगर में सवर्ण समाज लामबंद, विधायक को सौंपा जाएगा ज्ञापन

यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर ( राकेश भारतीय )केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी (UGC) से जुड़े प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज में असंतोष गहराता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार 28 जनवरी को सुबह 11 बजे यमुनानगर के नेहरू पार्क, मुख्य गेट पर सवर्ण समाज के लोग एकत्रित होकर रोष मार्च निकालेंगे और यमुनानगर विधायक को विरोध पत्र व मांग पत्र सौंपेंगे।

 


आयोजकों के अनुसार, इस प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार का ध्यान उन प्रावधानों की ओर आकर्षित करना है, जिन्हें सवर्ण समाज के लोग भेदभावपूर्ण और समाज को बांटने वाला बता रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों के प्रमुख सवाल
प्रदर्शन का आह्वान कर रहे संगठनों का कहना है कि—
यूजीसी जैसे कानूनों की आवश्यकता क्या थी, जिनसे समाजों के बीच विभाजन की आशंका पैदा हो रही है?
किसी निर्दोष व्यक्ति पर कार्रवाई से पहले जांच के प्रावधान क्यों हटाए गए?
यदि किसी शिकायतकर्ता की शिकायत झूठी साबित होती है, तो उस पर कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं है?
क्या ऐसे कानून हिंदू समाज को आपस में बांटने का काम नहीं कर रहे?
प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि सवर्ण समाज के बिना सनातन संस्कृति की कल्पना अधूरी है और ऐसे कानून सामाजिक सौहार्द को कमजोर कर सकते हैं।
सर्वसमाज से समर्थन की अपील
आयोजकों ने इसे केवल किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय बताते हुए सर्वसमाज से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवाज़ नहीं उठाई गई, तो इसके दूरगामी सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।
विभिन्न समाजों में भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, ब्राह्मण समाज, वैश्य समाज सहित अन्य वर्गों से जुड़े कई लोग भी यूजीसी से संबंधित प्रावधानों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।


क्या है ‘UGC’ को लेकर विवाद?
यूजीसी से जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि
शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई का प्रावधान दुरुपयोग की संभावना बढ़ा सकता है।
झूठी शिकायत की स्थिति में दंड का स्पष्ट प्रावधान न होना न्यायिक संतुलन पर सवाल खड़े करता है।
हालांकि सरकार का पक्ष है कि ये प्रावधान समानता और संरक्षण के उद्देश्य से बनाए गए हैं। इसी टकराव के कारण यह मुद्दा अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा में है।(खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इस प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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