फर्जी मजदूर, असली पैसा: प्लाइवुड नगरी यमुनानगर भी शक के घेरे में!

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कौन डकार गया मजदूरों के 1500 करोड़!  – भाग  2
फर्जी मजदूर, असली पैसा:
प्लाइवुड नगरी यमुनानगर भी शक के घेरे में!
राकेश भारतीय/ विजेश शर्मा
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर/चंडीगढ़।
श्रम विभाग में सामने आए 1500 करोड़ रुपये के कथित मजदूर घोटाले की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। यमुना टाइम्स की पड़ताल में संकेत मिल रहे हैं कि इस संगठित फर्जीवाड़े की आंच यमुनानगर जिले तक भी पहुंच सकती है — वह जिला जहां प्लाइवुड, लकड़ी और फैक्ट्री उद्योग के नाम पर हजारों मजदूर वर्षों से पंजीकृत दिखाए जाते रहे हैं।
जहां मजदूर ज्यादा, वहीं खेल आसान?
श्रम विभाग में सामने आए 1500 करोड़ रुपये के कथित मजदूर घोटाले मे प्रदेश के विभिन्न जिलों की फैक्ट्रीयों को दिखाया गया है, सूत्रों के अनुसार यमुनानगर सेंड भी कागजो पर फर्जी मजदूर दिखये गए । बता दें कि यमुनानगर को प्रदेश की प्लाइवुड इंडस्ट्री की राजधानी कहा जाता है। यहां
हज़ारों स्थायी-अस्थायी मजदूर
सैकड़ों फैक्ट्रियां रोज़ाना बड़े पैमाने पर श्रमिकों का आवागमन होता है । ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इसी भीड़भाड़ और अव्यवस्थित रिकॉर्ड का फायदा उठाकर कागज़ों में मजदूर खड़े कर दिए गए?
रिकॉर्ड में नाम, ज़मीन पर पहचान नहीं
सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर
एक ही मजदूर को अलग-अलग योजनाओं में दिखाया गया । वर्षों पुराने नामों पर लगातार भुगतान होता रहा ।
यहाँ तक कि बिना आधार, बिना उपस्थिति, बिना सत्यापन के पैसे जारी हुए । टाइम्स के हाथ लगे प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि कुछ मजदूर रजिस्टरों में दर्ज नामों को कभी फैक्ट्री गेट के बाहर भी नहीं देखा गया।
प्लाइवुड फैक्ट्रियां: ढाल या साधन?
जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि प्लाइवुड इंडस्ट्री का नाम लेकर
मजदूरों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई । योजनाओं का लाभ कागज़ों में बांटा गया जबकि असली मजदूर आज भी सुविधाओं से वंचित रहे । यह घोटाला केवल सरकारी नहीं, बल्कि मजदूरों के हको  का अपहरण है।
स्थानीय अफसरों की भूमिका पर सवाल
सबसे अहम सवाल यही है कि यमुनानगर में वर्षों तक यह सब कैसे चलता रहा?
श्रम निरीक्षक, विभागीय बाबू और अधिकारी क्या करते रहे?
क्या सब कुछ “ऊपर से मैनेज” था?
सूत्रों का दावा है कि कई फाइलों पर एक जैसे हस्ताक्षर और एक जैसी तारीखें दर्ज हैं, जो किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती हैं।
जांच बढ़ी तो खुलेंगे नए नाम
मौजूदा मंत्री अनिल विज द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई रिपोर्ट के बाद अब जांच का दायरा जिला स्तर तक फैलाने की तैयारी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में
यमुनानगर समेत औद्योगिक जिलों के रिकॉर्ड
फैक्ट्रियों से जुड़े मजदूर डेटा
और भुगतान से जुड़े बैंक खातों
की बारीकी से जांच होगी।
यमुना टाइम्स की अपील
यह लड़ाई किसी पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि
मजदूरों के हक़, टैक्स देने वाले नागरिकों के पैसे और सिस्टम की सफाई के लिए है।
अगर आप यमुनानगर या किसी अन्य जिले से हैं और फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान कागज़ों में दर्ज लेकिन हकीकत में गायब मजदूर या संदिग्ध श्रम विभागीय गतिविधियों की जानकारी रखते हैं, तो यमुना टाइम्स तक पहुंचाएं। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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