मजदूरों के नाम पर कौन डकार गया 1500 करोड़ !

इस खबर को सुनें
मजदूरों के नाम पर 1500 करोड़ की लूट!
पूर्व मंत्री अनूप धानक के कार्यकाल में श्रम विभाग बना ‘एटीएम’?
राकेश भारतीय / विजेंदर शर्मा
चंडीगढ़/यमुनानगर
हरियाणा के श्रम विभाग में सामने आया तथाकथित मजदूर घोटाला अब प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी घोटालों में गिना जा रहा है। शुरुआती दस्तावेज़ों और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर करीब 1500 करोड़ रुपये की सरकारी राशि के गबन की आशंका जताई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि घोटाले से जुड़े अधिकांश फर्जी बिल और भुगतान पूर्व श्रम मंत्री अनूप धानक के कार्यकाल के बताए जा रहे हैं।
मजदूर काग़ज़ों में, पैसा जेबों में
यमुना टाइम्स की पड़ताल में सामने आया है कि श्रम विभाग की योजनाओं में फर्जी मजदूर कॉपियां तैयार कर बड़े पैमाने पर भुगतान दिखाया गया। जिन मजदूरों के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये निकाले गए, उनका जमीनी अस्तित्व ही संदिग्ध है। फर्जी नाम, मनगढ़ंत हस्ताक्षर और झूठे कार्य विवरण के सहारे सरकारी खजाने पर सीधा डाका डाला गया।
इन जिलों में सबसे बड़ा खेल
रिकॉर्ड बताते हैं कि यह फर्जीवाड़ा किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहा । यमुनानगर के साथ साथ
हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, भिवानी और फरीदाबाद में सबसे ज्यादा बिल पास किए गए। सूत्रों का कहना है कि कई फाइलें एक ही पैटर्न पर तैयार की गईं, जिससे यह साफ़ होता है कि पूरा खेल संगठित तरीके से खेला गया।

 

कौन बचाता रहा सिस्टम को?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
वर्षों तक फर्जी बिल कैसे पास होते रहे?
ऑडिट और निरीक्षण कहां गायब था?
क्या बिना राजनीतिक संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव था? पड़ताल में यह भी सामने आ रहा है कि कई मामलों में भुगतान तेज़ी से क्लियर किए गए, मानो विभाग किसी दबाव में काम कर रहा हो।
अनिल विज की एंट्री से हिला विभाग
मामले की परतें खुलने के बाद मौजूदा श्रम मंत्री अनिल विज ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है,उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई है और संकेत हैं कि जल्द ही विजिलेंस और अन्य जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो सकती हैं।
बड़े नाम, बड़ी कार्रवाई तय?
यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह घोटाला केवल अफसरों तक सीमित नहीं रहेगा। सूत्रों का दावा है कि इसमें
विभागीय अधिकारी,कर्मचारी,ठेकेदार
और राजनीतिक संरक्षण देने वाले चेहरे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
यमुना टाइम्स की चेतावनी
यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों के हक़ पर डाका डालने का है। यदि इस घोटाले को ठंडे बस्ते में डाला गया, तो यह सिस्टम के लिए एक खतरनाक मिसाल बनेगा।
यमुना टाइम्स इस मामले पर नज़र बनाए रखेगा और दस्तावेज़ों के साथ आगे भी खुलासे जारी रखेगा।
स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे