15 वर्षों से जारी न्याय की लड़ाई

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15 वर्षों से जारी न्याय की लड़ाई: ताला झील पार्क हादसे में मृत आरती सिंह गुप्ता के लिए फिर उठा न्याय का स्वर
 यमुना टाइम्स ब्यूरो
कोलकाता (पश्चिम बंगाल):
पिछले 15 वर्षों से एक खामोश लेकिन दृढ़ संघर्ष न्याय के लिए जारी है। यह संघर्ष है किन्शुक सेन गुप्ता का, जो स्वर्गीय आरती सिंह गुप्ता के पुत्र हैं। आरती सिंह गुप्ता की मृत्यु ताला झील पार्क में उस समय हो गई थी, जब वे रोज़ की तरह सुबह की सैर पर निकली थीं।
बताया जाता है कि उस दिन एक सरकारी वाहन, जिसमें भारी लकड़ी के लट्ठे (टिम्बर ट्रक जैसे) लदे हुए थे, को पार्क के भीतर प्रवेश की अनुमति दी गई थी। इसी वाहन की चपेट में आने से आरती सिंह गुप्ता की दुर्घटनावश मौत हो गई। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति थी, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी गंभीर उदाहरण बनी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद से परिवार ने कभी हार नहीं मानी। किन्शुक सेन गुप्ता, जो कि जन समाज कल्याण संघ (JSS), पश्चिम बंगाल के सदस्य हैं, लगातार इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। बीते 15 वर्षों में उन्होंने प्रदर्शन, जन-जागरूकता अभियान और प्रशासन को बार-बार ज्ञापन देकर न्याय की मांग को जीवित रखा है।
आंदोलन की मुख्य मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
ताला झील पार्क जैसे सार्वजनिक पार्कों में किसी भी सरकारी या व्यावसायिक वाहन के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। यह पार्क खासतौर पर सुबह-शाम टहलने वालों, बुजुर्गों, महिलाओं और परिवारों के लिए बनाया गया है, न कि भारी वाहनों के लिए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक मां की मौत का मामला नहीं है, बल्कि जन-सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि 15 साल बीत जाने के बावजूद आज तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
हालिया प्रदर्शन रैली के माध्यम से एक बार फिर किन्शुक सेन गुप्ता और उनके समर्थकों ने सरकार से मांग की है कि
आरती सिंह गुप्ता को न्याय दिलाया जाए
प्रशासन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करे
और भविष्य में ऐसे सख्त नियम लागू किए जाएं ताकि पार्क सुरक्षित रहें
ताकि फिर किसी परिवार को इस तरह की असहनीय कीमत न चुकानी पड़े।
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