तहसील में दलालों का कथित साम्राज्य! अधिकारियों से नजदीकी का दावा, आम आदमी की जेब पर डाका?
रजिस्ट्री करवाने के नाम पर 4.25 लाख रुपये लेने का आरोप
खुद को वकील बताकर अधिकारियों से सीधी पहुंच होने की बात कहता था आरोपी
FIR दर्ज होने के बाद तहसील परिसर में सक्रिय कथित बिचौलियों की भूमिका पर उठे सवाल
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर(राकेश भारतीय) यमुनानगर-जगाधरी तहसील में कथित दलाली और अधिकारियों से नजदीकी के नाम पर आम लोगों से मोटी रकम ऐंठने का मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। तहसील परिसर में सक्रिय बताए जा रहे ऐसे लोगों की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब एक दर्ज FIR ने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

मामला केवल किसी व्यक्ति द्वारा अधिकारियों से पहचान होने का दावा करने तक सीमित नहीं है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार एक व्यक्ति ने खुद को वकील बताते हुए दावा किया कि तहसील में अधिकारियों के साथ उसकी अच्छी सांठगांठ है और रजिस्ट्री जैसे काम वह आसानी से करवा सकता है।
रजिस्ट्री करवाने के नाम पर 4 लाख 25 हजार रुपये लेने का आरोप
FIR नंबर 416, दिनांक 29 सितंबर 2026 के अनुसार शिकायतकर्ता सुचित भाटिया निवासी प्रोफेसर कॉलोनी, जगाधरी ने पुलिस को दी शिकायत में प्रवीण कुमार नामक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के मुताबिक प्रवीण कुमार ने खुद को वकील बताया और कहा कि तहसील में अधिकारियों के साथ उसकी अच्छी सांठगांठ है। यदि किसी व्यक्ति को रजिस्ट्री का खसरा नंबर नहीं मिलता या प्रॉपर्टी आईडी से संबंधित काम अटकता है तो वह अधिकारियों से बातचीत करके काम करवा सकता है।
शिकायत में बताया गया है कि एक प्रॉपर्टी डीलर के माध्यम से शिकायतकर्ता की मुलाकात हुई और मकान की रजिस्ट्री करवाने के सिलसिले में बातचीत हुई। आरोप है कि रजिस्ट्री तथा स्टांप सहित अन्य खर्चों के नाम पर शिकायतकर्ता से 4 लाख 25 हजार रुपये नकद लिए गए।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि इस लेन-देन के संबंध में सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। उसने अपनी रकम वापस दिलवाने की मांग करते हुए पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई।
FIR में इन धाराओं के तहत मामला दर्ज
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए थाना सेक्टर-17 हुडा, जगाधरी में 29 सितंबर 2026 को FIR नंबर 416 दर्ज की गई।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2) और 318(4) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है। FIR में प्रवीण कुमार का नाम आरोपी के रूप में दर्ज है और जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार को सौंपी गई है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR में दर्ज आरोप अभी जांच के अधीन हैं और आरोपी के दोषी होने का फैसला न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।

तहसील में ऐसे और कितने लोग सक्रिय?
यह मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जगाधरी तहसील में क्या वास्तव में कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं जो अधिकारियों से अपनी नजदीकी का दावा करके आम जनता के काम करवाने के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं?
आम आदमी यदि अपने वैध काम के लिए सरकारी दफ्तर पहुंचता है तो उसे कई बार प्रक्रिया समझने, दस्तावेज पूरे करवाने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने में परेशानी होती है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कथित बिचौलिए अपनी पहुंच और पहचान का रौब दिखाते हैं।
दावा किया जाता है कि अधिकारियों से सीधी बातचीत है, काम तुरंत हो जाएगा और सरकारी दफ्तरों के चक्कर भी नहीं काटने पड़ेंगे। ऐसे दावों के पीछे कितनी वास्तविकता है और कितने लोग केवल अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करके अपना धंधा चला रहे हैं, इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यमुना टाइम्स को विभागीय अधिकारों के पक्ष का भी इंतजार रहेगा
प्रशासन से सीधे सवाल
तहसील परिसर में सक्रिय कथित बिचौलियों की पहचान कर कार्रवाई कब होगी?
क्या अधिकारियों के नाम पर आम जनता से पैसे लेने वालों की गतिविधियों की जांच होगी?
क्या तहसील परिसर में आम नागरिकों के लिए पारदर्शी शिकायत व्यवस्था बनाई जाएगी?
क्या प्रत्येक कार्य की निर्धारित फीस और समय-सीमा सार्वजनिक की जाएगी?
क्या प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी व्यक्ति सरकारी काम करवाने के नाम पर अवैध रूप से रकम न वसूल सके?
सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं, पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता का है। सरकारी दफ्तर में काम करवाने के लिए जनता को अधिकारियों के बजाय कथित दलालों की चौखट पर क्यों जाना पड़े?
जिला प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसील परिसर में सक्रिय बिचौलियों की भूमिका की जांच करवानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
==========
विशेष बॉक्स |
यमुना टाइम्स Impact : खबर का असर
शुरू हुए डिजिटल हस्ताक्षर
यमुना टाइम्स ने इससे पहले जगाधरी तहसील में सरकार के डिजिटल हस्ताक्षर संबंधी आदेशों की कथित अनदेखी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
समाचार में बताया गया था कि सरकारी आदेशों के बावजूद अधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे, जिसके चलते आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही थी।
यमुना टाइम्स द्वारा यह मामला उठाए जाने के बाद अब जगाधरी तहसील में डिजिटल हस्ताक्षर होने शुरू हो गए हैं।
यमुना टाइम्स इस सकारात्मक बदलाव का स्वागत करता है और संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ सरकार का भी धन्यवाद करता है कि इस व्यवस्था से आम जनता को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल रही है।
हमारा उद्देश्य केवल खबर प्रकाशित करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाकर सकारात्मक बदलाव लाना है।
यमुना टाइम्स — जो सही खबर वही।











