फर्जी GRN नंबरों का खेल: यमुनानगर-जगाधरी में 21.30 करोड़ का कथित आबकारी घोटाला !

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फर्जी GRN नंबरों का खेल: यमुनानगर-जगाधरी में 21.30 करोड़ का कथित आबकारी घोटाला !

मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया मामला,छह शराब ठेके सील; अब जांच कमेटी खंगाल रही है रिकॉर्ड

यमुना टाइम्स एक्सक्लूसि

यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर ( राकेश भारतीय )यमुनानगर-जगाधरी के शराब कारोबार से जुड़ा 21.30 करोड़ रुपये का कथित फर्जीवाड़ा अब सिर्फ शराब ठेकों तक सीमित मामला नहीं रह गया है। इस प्रकरण ने आबकारी विभाग के सरकारी सॉफ्टवेयर, GRN नंबरों की सत्यता, परमिट जारी करने की प्रक्रिया और विभागीय निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यमुना टाइम्स की पड़ताल में सामने आए विभागीय कार्रवाई से जुड़े तथ्यों के मुताबिक, दो शराब फर्मों के मामले में बड़ी संख्या में GRN नंबरों के आधार पर परमिट जारी किए जाने का मामला जांच के दायरे में आया है।

विभागीय जांच में एचएस लिकर के मामले में 103 और महेंद्र सिंह एंड संस के मामले में 65 GRN नंबरों से जुड़े परमिट की बात सामने आई है। इन दोनों मामलों में कथित राजस्व नुकसान का आंकड़ा क्रमशः करीब 12.36 करोड़ और 8.93 करोड़ रुपये बताया गया है।


अभिनव कोहली की शिकायत से उठा पर्दा
इस पूरे मामले को सामने लाने वालों में अभिनव कोहली की शिकायत महत्वपूर्ण कड़ी बनी। कोहली ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के समक्ष शराब कारोबार से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और GRN से संबंधित अनियमितताओं की शिकायत की थी। शिकायत के बाद मामला विभाग के संज्ञान में आया और आगे विभागीय स्तर पर जांच तथा कार्रवाई शुरू हुई।
सवाल सिर्फ 21 करोड़ का नहीं… सवाल सिस्टम का है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में फर्जी GRN नंबरों के आधार पर परमिट जारी किए जाने की बात सही पाई जाती है तो—
इतनी बड़ी संख्या में GRN नंबर सिस्टम में कैसे आए?
उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
इन नंबरों के आधार पर परमिट जारी करने से पहले विभागीय स्तर पर जांच क्यों नहीं हुई?
और सबसे अहम—
क्या यह सिर्फ सिस्टम में हुई तकनीकी/प्रशासनिक चूक थी या इसके पीछे किसी संगठित स्तर पर मिलीभगत की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?
इन सवालों का जवाब अभी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

पहले 4.75 करोड़ जमा, फिर छह ठेकों पर सील
मामले में विभागीय कार्रवाई के दौरान संबंधित पक्ष की ओर से 4.75 करोड़ रुपये जमा किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद कुछ ठेकों को खोला गया था। बाद में करीब 16.25 करोड़ रुपये के नोटिस के बाद विभाग ने फिर कार्रवाई करते हुए दोनों फर्मों के तीन-तीन, कुल छह शराब ठेकों को सील कर दिया। कार्रवाई जगाधरी बस स्टैंड, अग्रसेन चौक, बुडिया चुंगी और खजूरी रोड सहित विभिन्न स्थानों पर हुई।
विभाग ने जांच कमेटी बनाई
आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की जांच के लिए मुख्यालय स्तर से कमेटी गठित की गई है। कमेटी GRN रिकॉर्ड, परमिट, संबंधित दस्तावेजों और राजस्व से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। विभाग की ओर से करीब 5 करोड़ रुपये की रिकवरी किए जाने की बात भी सामने आई है, जबकि शेष राशि की रिकवरी की प्रक्रिया जारी बताई गई है।

यमुना टाइम्स का सवाल
यह मामला अब इस बात की जांच की मांग करता है कि 21.30 करोड़ रुपये के कथित राजस्व नुकसान की अंतिम राशि कितनी है और फर्जी GRN तैयार होने से लेकर परमिट जारी होने तक जिम्मेदारी की कड़ी कहां-कहां जुड़ती है?
अगर सरकारी सिस्टम में फर्जी नंबर जनरेट हुए और उन्हीं के आधार पर करोड़ों रुपये के परमिट जारी हुए, तो जिम्मेदारी सिर्फ ठेकेदार तक सीमित रहेगी या सिस्टम के भीतर की भूमिका भी जांची जाएगी?
यमुना टाइम्स इस मामले में शिकायत, विभागीय रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष को लगातार सामने लाएगा।

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