याद्दी हत्याकांड में कुरुक्षेत्र कनेक्शन के बाद जगाधरी तक पहुंची जांच की कड़ी!
हमलावरों की रेकी और ठहरने को लेकर भी जांच, निजी होटल के रिकॉर्ड खंगालने की चर्चा; बाइक की कड़ी पहले ही कुरुक्षेत्र तक पहुंच चुकी
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर, 9 सितंबर (राकेश भारतीय ) मॉडल टाउन में फाइनेंसर एवं ट्रांसपोर्ट कारोबारी हरभजन सिंह उर्फ याद्दी की हत्या की जांच अब केवल वारदात स्थल और सीसीटीवी फुटेज तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस हमलावरों के आने-जाने के रास्ते, इस्तेमाल की गई बाइक और वारदात से पहले उनकी गतिविधियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में इस्तेमाल बाइक के तार कुरुक्षेत्र से जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि शूटर यमुनानगर कब पहुंचे और वारदात से पहले उन्होंने कहां ठिकाना बनाया था।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि हमलावरों ने वारदात से पहले हरभजन सिंह की रेकी की थी। तीन सितंबर की सुबह जिम से बाहर निकलते ही बाइक सवार दो हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया और फरार हो गए। पुलिस अब उनके पूरे मूवमेंट को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
इसी कड़ी में जगाधरी के एक निजी होटल में संदिग्धों के ठहरने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, इस जानकारी की अभी पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे जांच का संभावित पहलू ही माना जाना चाहिए। यदि जांच में यह बात सही साबित होती है तो पुलिस के लिए होटल का सीसीटीवी, रजिस्टर, पहचान-पत्र और आने-जाने का समय हमलावरों की पहचान तक पहुंचने में अहम कड़ी साबित हो सकता है।
कुरुक्षेत्र से जगाधरी और फिर मॉडल टाउन?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि जिस बाइक के तार कुरुक्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं, उसके बाद हमलावर यमुनानगर कब और किस रास्ते पहुंचे। क्या उन्होंने पहले कुरुक्षेत्र में कोई संपर्क किया, वहां से बाइक हासिल की और फिर यमुनानगर पहुंचे? क्या वारदात से एक-दो दिन पहले उन्होंने शहर में रहकर रेकी की? और अगर वे किसी होटल में ठहरे थे तो उनकी पहचान के लिए वहां लगे कैमरों में क्या कोई सुराग मौजूद है?
पुलिस पहले ही होटल, गेस्ट हाउस और लॉज के रिकॉर्ड खंगाल रही है तथा संचालकों को प्रत्येक ग्राहक की आईडी जांचने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन टीमें तलाश में, लेकिन असली कड़ी अभी बाकी
हरभजन सिंह हत्याकांड में पुलिस की तीन टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। अब जांच का असली केंद्र यह पता लगाना है कि हमलावरों ने वारदात की योजना कहां बनाई, यमुनानगर में उनकी मदद किसने की और हत्या के बाद वे किस रास्ते से निकले।
कुरुक्षेत्र से जुड़ी बाइक और यमुनानगर में संभावित ठहराव—अगर इन दोनों कड़ियों को सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों से जोड़ लिया जाता है तो जांच को बड़ा सुराग मिल सकता है।
यमुना टाइम्स का सवाल: हत्या जैसी सुनियोजित वारदात को अंजाम देने वाले शूटर क्या बिना किसी स्थानीय मदद के शहर में रेकी और ठहराव कर सकते थे? पुलिस के लिए अब सिर्फ शूटरों को पकड़ना ही चुनौती नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और वारदात से पहले की गतिविधियों की कड़ी जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।
नोट: होटल में ठहरने संबंधी जानकारी को फिलहाल आधिकारिक पुष्टि के अभाव में तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि जांच के संभावित पहलू के रूप में ही देखा जाना चाहिए।











