याद्दी हत्याकांड की जिम्मेदारी रोहित गोदारा और शुभम पंडित ने ली!

इस खबर को सुनें

यमुनानगर में जिम के बाहर गोलियों की गूंज… और फिर सोशल मीडिया पर आया गैंगस्टरों का दावा

हरभजन सिंह उर्फ याद्दी हत्याकांड की जिम्मेदारी रोहित गोदारा और शुभम पंडित ने ली! पुलिस के सामने अब कई सवाल

यमुनानगर, 4 सितंबर। राकेश भारतीय

यमुनानगर के पॉश मॉडल टाउन में गुरुवार सुबह जिम के बाहर ट्रांसपोर्ट एवं फाइनेंस कारोबारी हरभजन सिंह उर्फ यद्दी की सनसनीखेज हत्या ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। सुबह करीब आठ बजे बाइक सवार बदमाशों ने जिम से बाहर निकलकर अपनी कार की ओर बढ़ रहे हरभजन सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

वारदात इतनी तेजी से हुई कि हमलावर कुछ ही मिनटों में गोलियां बरसाकर फरार हो गए। घटनास्थल से 17 खोल बरामद होने की बात सामने आई है, जबकि पोस्टमार्टम संबंधी रिपोर्टों में शरीर में कई गोलियां लगने की जानकारी सामने आई है।

लेकिन इस सनसनीखेज हत्याकांड की कहानी में असली मोड़ तब आया, जब देर शाम सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई।

 

सोशल मीडिया पोस्ट में जिम्मेदारी लेने का दावा

सोशल मीडिया पर सामने आई पोस्ट में गैंगस्टर रोहित गोदारा और शुभम पंडित के नाम से हरभजन सिंह हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में सीधे तौर पर हरभजन सिंह हत्याकांड का जिक्र करते हुए शुभम पंडित और रोहित गोदारा द्वारा जिम्मेदारी लेने की बात लिखी गई है।

हालांकि, इस पोस्ट की स्वतंत्र पुष्टि अभी पुलिस अथवा किसी आधिकारिक एजेंसी ने नहीं की है। लिहाजा इस दावे को फिलहाल सोशल मीडिया पर सामने आया दावा ही माना जाना चाहिए।

कौन है शुभम पंडित? यमुनानगर से जुड़ता है नाम

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण नाम शुभम पंडित का है। शुभम का नाम पहले भी यमुनानगर के चर्चित खेड़ी लक्खा सिंह तिहरे हत्याकांड की जांच में सामने आ चुका है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, उस मामले में शुभम पंडित का नाम कथित शूटरों में आया था और उस पर इनामी राशि भी घोषित की गई थी। उसी मामले में नोनी राणा ने सोशल मीडिया के माध्यम से हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था।

यानी यमुनानगर में गैंगवार और सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का यह सिलसिला पुलिस के लिए बिल्कुल नया नहीं है।

क्या पुरानी दुश्मनी बनी हत्या की वजह?

हरभजन सिंह की हत्या के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्हें निशाना क्यों बनाया गया?

प्रारंभिक जांच में पुलिस कई एंगल पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतक के परिवार के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह से पारिवारिक संबंध बताए गए हैं। शिकायत में परिवार की ओर से पूर्व विधायक से जुड़े पुराने विवाद और कथित दुश्मनी के एंगल की ओर भी इशारा किया गया है।

यही कारण है कि सोशल मीडिया पर सामने आए गैंग के दावे को पुलिस किस नजरिए से देखती है, यह जांच का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

SP आवास और विधायक आवास के इतने करीब वारदात

इस हत्याकांड ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटनास्थल के बारे में सामने आई जानकारी के मुताबिक, विधायक आवास करीब 200 मीटर और SP आवास करीब 300 मीटर की दूरी पर बताया गया है। इसके बावजूद दो बाइक सवार बदमाश सुबह के समय जिम के बाहर पहुंचते हैं, गोलियां चलाते हैं और फरार हो जाते हैं।

अब पुलिस के लिए चुनौती सिर्फ हत्यारों तक पहुंचना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना भी है कि हमलावरों ने घटनास्थल तक पहुंचने और वारदात के बाद फरार होने के लिए किस रास्ते का इस्तेमाल किया।

CCTV और मोबाइल जांच से खुलेंगे राज?

पुलिस आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही मृतक के मोबाइल फोन की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि हत्या से पहले हरभजन सिंह के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या उन्हें किसी तरह की धमकी या चेतावनी मिली थी।

अब सबसे बड़ा सवाल…

अगर सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में किया गया दावा सही साबित होता है तो यमुनानगर पुलिस के सामने एक बार फिर गैंगवार, सुपारी किलिंग और सोशल मीडिया के जरिए अपराध की जिम्मेदारी लेने वाले नेटवर्क की बड़ी चुनौती होगी।

लेकिन फिलहाल यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया पोस्ट को पुलिस की आधिकारिक पुष्टि मिलने तक अंतिम सत्य न माना जाए।

हरभजन सिंह की हत्या की जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ हो सकता है कि—

क्या वाकई रोहित गोदारा और शुभम पंडित के नेटवर्क ने इस वारदात को अंजाम दिया?

क्या हरभजन सिंह किसी पुरानी गैंगवार की कड़ी बन गए?

क्या हत्या के पीछे पूर्व विधायक से जुड़ा विवाद है?

या फिर इस पूरे हत्याकांड के पीछे कोई तीसरी कहानी है?

इन सवालों के जवाब अब पुलिस की जांच, CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और आरोपियों की गिरफ्तारी से ही सामने आएंगे।

Yamuna Times इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे