पूर्व विधायक चौधरी अर्जुन सिंह का राजनीतिक संन्यास: खादर की राजनीति में लंबे समय तक महसूस होगा एक बेबाक आवाज का अभाव
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर ( राकेश भारतीय )जिले की राजनीति, खासकर खादर क्षेत्र की सियासत में एक ऐसा अध्याय फिलहाल थम गया है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी। करीब साढ़े तीन दशक तक राजनीति में सक्रिय रहे पूर्व विधायक चौधरी अर्जुन सिंह ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। हालांकि उन्होंने इसे सामाजिक जिम्मेदारी मिलने से जुड़ा निर्णय बताया है, लेकिन उनके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल और चर्चाएं भी छोड़ दी हैं।

चौधरी अर्जुन सिंह की पहचान महज एक राजनीतिक दल के नेता के रूप में नहीं, बल्कि बेबाकी से अपनी बात रखने वाले, जनहित के मुद्दों पर मुखर रहने वाले और साफ छवि वाले नेता के तौर पर रही है। राजनीति में रहते हुए उन्होंने कई बार सत्ता और संगठन की सीमाओं से अलग हटकर जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी। यही उनकी राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता भी रही।

अर्जुन सिंह ने बुधवार को राजनीति से संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि अब वह केवल गुर्जर समाज तक सीमित न रहकर सर्व समाज के कल्याण और सामाजिक सौहार्द के लिए सामाजिक मंच के माध्यम से काम करेंगे। उनका कहना है कि हरियाणा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुर्जर समाज के लोगों का संपर्क हो रहा है और उन्हें सहारनपुर की तर्ज पर सामाजिक कार्यक्रम शुरू करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। जल्द ही इस दिशा में काम शुरू किया जाएगा।

राजनीतिक सफर की बात करें तो अर्जुन सिंह ने जमीनी स्तर से शुरुआत की। पंच से लेकर पंचायत समिति सदस्य तक की जिम्मेदारियां निभाईं और धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति में अपनी जगह बनाई। युवा गुर्जर समिति, किसान यूनियन, हविपा और जजपा सहित विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों में उन्होंने जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2004 में बसपा के टिकट पर छछरौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित होकर उन्होंने विधानसभा तक का सफर तय किया।
वर्तमान में वह राष्ट्रीय गुर्जर समन्वय समिति के उपप्रधान की जिम्मेदारी निभा रहे हैं और अब उनका कहना है कि आने वाला समय सामाजिक एकता, भाईचारे और सर्व समाज के हित में काम करने का होगा।

अर्जुन सिंह का राजनीतिक सफर इसलिए भी अलग नजर आता है क्योंकि उन्होंने समय के साथ राजनीतिक दल जरूर बदले, लेकिन अपने समर्थकों और जनता के बीच उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति की रही जिसने मुद्दों को व्यक्ति और दल से ऊपर रखने की कोशिश की। किसी राजनीतिक नेता से मतभेद हुआ तो उन्होंने उसे सार्वजनिक कटुता में बदलने के बजाय आमने-सामने बैठकर अपनी बात रखने को प्राथमिकता दी।

यही कारण रहा कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं के साथ उनके संबंध रहे। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक, अलग-अलग राजनीतिक दौर में उनके साथ मतभेद और राजनीतिक दूरी जरूर रही, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर अर्जुन सिंह की स्पष्टवादिता और राजनीतिक शैली की सराहना भी होती रही।
यमुनानगर की राजनीति में साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं की संख्या हमेशा उंगलियों पर गिनने लायक रही है। ऐसे में अर्जुन सिंह का राजनीति से हटना केवल उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं माना जा सकता। राजनीति को करीब से देखने वाले लोग इसे बदलते राजनीतिक माहौल के संदर्भ में भी देख रहे हैं। राजनीति में बढ़ता छल-कपट, आरोप-प्रत्यारोप, स्वार्थ की गणित और दिल में कुछ और, जुबान पर कुछ और वाली कार्यशैली से उनका मोहभंग भी इस फैसले की एक वजह माना जा रहा है। हालांकि अर्जुन सिंह स्वयं अपने निर्णय को सामाजिक दायित्व से जोड़कर देख रहे हैं।
सियासत में पैंतरे बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अर्जुन सिंह की राजनीति की खासियत यह रही कि उन्होंने दल या राजनीतिक समीकरण बदलने के बावजूद जनता के मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बनाए रखने का दावा किया। शायद यही वजह है कि राजनीतिक सफर में कई मोड़ आने के बावजूद उनकी व्यक्तिगत छवि पर उतनी धूल नहीं जमी, जितनी आमतौर पर दल बदलने वाले नेताओं पर देखने को मिलती है।
अब जब चौधरी अर्जुन सिंह ने सक्रिय राजनीति से किनारा कर सामाजिक क्षेत्र में अपनी भूमिका तय करने का फैसला किया है, तो देखना दिलचस्प होगा कि उनका अनुभव और बेबाकी सामाजिक मंच पर किस रूप में सामने आती है।
राजनीति से उनका संन्यास भले ही एक व्यक्ति का निर्णय हो, लेकिन खादर की राजनीति में एक बेबाक आवाज का खाली हुआ स्थान इतनी आसानी से भरने वाला नहीं है।
क्योंकि राजनीति में नेता बहुत आते हैं, दल बदलते हैं, समीकरण बनते-बिगड़ते हैं…
लेकिन जनता के मुद्दे पर अपनी बात कहने का साहस और अपनी बात पर खड़े रहने की पहचान हर किसी के हिस्से नहीं आती।

चौधरी अर्जुन सिंह ने राजनीति में करीब 35 वर्ष बिताए हैं। अब उनका अगला सफर राजनीति की कुर्सी से दूर, सामाजिक जिम्मेदारी के रास्ते पर होगा। यह देखना बाकी है कि सियासत का यह पुराना खिलाड़ी समाज सेवा के मैदान में अपनी दूसरी पारी किस अंदाज में खेलता है।












