इस्तीफा पहले या निष्कासन?
जेजेपी के दो पत्र सामने आने के बाद यमुनानगर की राजनीति में फिर गरमाया विवाद
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर ( राकेश भारतीय ) जननायक जनता पार्टी में नेताओं के इस्तीफे और निष्कासन को लेकर शुरू हुआ सियासी घमासान अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले महिला सेल की जिला अध्यक्ष गुरजीत कौर संधू और वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष प्रदीप पंडित के पार्टी छोड़ने की खबर सामने आई, फिर जेजेपी के जिला अध्यक्ष इंतजार अली ने दावा किया कि दोनों को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित किया गया था।
लेकिन अब इस विवाद में दो महत्वपूर्ण पत्र सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है।

19 अगस्त का त्यागपत्र बनाम 22 अगस्त का निष्कासन पत्र
गुरजीत कौर संधू का हस्तलिखित त्यागपत्र सामने आया है, जिस पर 19 अगस्त 2026 की तारीख दर्ज है। पत्र में उन्होंने जननायक जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही है।

दूसरी ओर, जेजेपी महिला प्रकोष्ठ की ओर से जारी पत्र में गुरजीत कौर को 22 अगस्त 2026 को पार्टी से निष्कासित किए जाने की जानकारी दी गई है। पत्र में उन पर सार्वजनिक रूप से पार्टी हित के विपरीत राजनीतिक गतिविधियां करने तथा पार्टी नेतृत्व की ओर से दी गई सलाह और चेतावनी के बावजूद गतिविधियों में बदलाव नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

यानी सामने मौजूद दस्तावेजों में एक पत्र 19 अगस्त का त्यागपत्र है और दूसरा 22 अगस्त का निष्कासन पत्र।
अब सवाल—पहले क्या हुआ?
यही वह सवाल है जिसने यमुनानगर की राजनीति को फिर गर्म कर दिया है।

यदि गुरजीत कौर का त्यागपत्र 19 अगस्त को दिया जा चुका था, तो 22 अगस्त को जारी निष्कासन पत्र की स्थिति क्या थी?
और यदि पार्टी का कहना है कि पहले उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया, तो 19 अगस्त के त्यागपत्र को पार्टी किस रूप में देखती है?

फिलहाल दोनों पत्र सार्वजनिक होने के बाद ‘इस्तीफा पहले या निष्कासन पहले’ की बहस ने जोर पकड़ लिया है।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे
गुरजीत कौर संधू ने पार्टी छोड़ने के पीछे संगठन में महिलाओं को उचित मान-सम्मान नहीं मिलने की बात कही थी। वहीं वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष प्रदीप पंडित ने भी पार्टी की स्थानीय कार्यप्रणाली और कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को लेकर नाराजगी जताते हुए पार्टी छोड़ने की बात कही थी।
दूसरी ओर जिला अध्यक्ष इंतजार अली का कहना है कि दोनों नेताओं को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पहले ही पार्टी से बाहर किया जा चुका था और इसके बाद सोशल मीडिया पर त्यागपत्र देने की बात कही गई।

दस्तावेज सामने हैं, फैसला जनता पर
अब दोनों पक्षों के दावे और दोनों पत्र सामने हैं। ऐसे में कौन सच बोल रहा है और कौन गलत—इसका अंतिम फैसला पाठक और राजनीतिक कार्यकर्ता अपने स्तर पर करें।
फिलहाल इतना जरूर है कि जेजेपी की अंदरूनी खींचतान अब बंद कमरे की बात नहीं रही। त्यागपत्र और निष्कासन के दो अलग-अलग दस्तावेजों ने इस राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है।
आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्ष इस घटनाक्रम से जुड़े और दस्तावेज या स्पष्टीकरण सामने लाते हैं, तो तस्वीर और साफ हो सकती है।
यमुनानगर की राजनीति में अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि कौन पार्टी में है और कौन बाहर—बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आखिर घटनाक्रम में पहला कदम किसने उठाया था?










