नेताजी जी अस्वस्थ,जनता परेशान लेकिन इनकी खिली बाँछे….

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नेताजी जी अस्वस्थ,जनता परेशान लेकिन इनकी खिली बाँछे….

फकीरा चलते-चलते

“कुर्सी की खुजली और नेताओं का मौसम”

 

चलते-चलते फकीरा आज फिर बाजार में बैठा था। सुबह शाम की सर्दी बढ़ गई है इसलिए शाम को लोग गांव में तो अलाव जला लेते हैं लेकिन शहरों में अलाव जलाना तो दूर की बात लोगों के पास शायद फुर्सत ही नहीं है कुछ लोग भले ही पार्क आदि या वैवाहिक कार्यक्रमों में मिल लेते हो लेकिन जिंदगी की भाग दौड़ में नगर के लोग अत्यंत व्यस्त हो चले हैं यही तो कारण है की फकीरा को राजनीतिक संगठनों के अलावा कभी अपनी आवाज उठाने के लिए लोग आगे आते हुए नहीं दिखते, फकीरा से लोग कहते हैं कि वार्ड 12 की रायपुर कॉलोनी में पानी में रेत आ रही है, पुराना हमीदा के लोग कहते हैं कि फकीरा पुराना हमीदा मे सीवरेज के कई ढक्कन खुले पड़े है, इंडस्ट्रियल एरिया में बड़ी-बड़ी फैक्ट्री

 

वाले लोग हद से ज्यादा अतिक्रमण कर रहे हैं गरीबों को तो निगम के अधिकारी तुरंत हटा देते हैं लेकिन इन पर कार्रवाई कौन करेगा? अब तो आलम यह हो चला है कि इंडस्ट्रियल एरिया में एक बड़े नेता ने बंद पड़ी प्लाईवुड फैक्ट्री को खरीद कर वहां कॉलोनी काटनी शुरू कर दी है लेकिन हम क्या करें? फ़कीर ने जब कहा की मांग पत्र दो प्रशासन को तो सब चुप लगता है शहर के लोगों ने अपनी समस्याएं उठाने का पूरा जिम्मा राजनीतिक दलों के नेताओं पर छोड़ दिया है बहुत ही कम लोग हैं जो अपने और समाज के हक की आवाज उठा रहे हैं! खैर मैं बात कर रहा था मौसम में आए बदलाव की दोपहर को थोड़ी गर्मी अभी भी होती लेकिन आज दोपहर को भी हवा में हल्की ठंडी खुशबू थी, पर राजनीति की गरमी वही पुरानी—जो न मानसून मानती है, न सर्दी, न बारिश।
यह गरमी ऐसी कि कुर्सियों के नीचे रखे पुराने बोरे तक आग पकड़ लें और नेता जी अपने कुर्ते से पसीना पोछते हुए बोलें— “सब राजनीति की साजिश है भई।”फकीरा मुस्कुराया।

हरियाणा में मौसम से ज्यादा तेजी से नेताओं का तापमान बदलता है।
सुबह विपक्ष, दोपहर में निष्पक्ष, और शाम होते-होते फिर से संभावित सत्तापक्ष।

यहां एक ही नियम चलता है
“कुर्सी हो तो कमल खिलता है; कुर्सी जाए तो हरियाणा की धरती याद आती है।”
कुर्सी की खुजली – फकीरा का नया शोध इन दिनों फकीरा के पास एक नया शोध आया है।नेताओं में एक बीमारी तेजी से फैल रही है—

 


“कुर्सी खुजली वायरस”।
इस बीमारी में नेता जी दिन में कम से कम पाँच बार पक्ष बदलने की इच्छा महसूस करते हैं।
लक्षण कुछ ऐसे:
सुबह उठते ही बयान: “हम जनता के साथ हैं।”दोपहर को फोन आता है: “सर, मंत्री जी कह रहे थे…” शाम होते-होते नेता जी का सुर बदल जाता है: “देशहित में निर्णय लिया है।”हरियाणा की राजनीति में यह वायरस कई दशक से सक्रिय है। कुछ नेता तो इतने अनुभवी हो गए हैं कि कुर्सी की दिशा देखकर हवा का रुख बता देते हैं।

 

कौन बनेगा गांव का चौधरी
देसी चौपाल में आज की चर्चा
फकीरा जब चौपाल पहुँचा तो बुजुर्ग कह रहे थे:“बेटा, हरियाणा में चुनाव अब भले ही कुछ दूर हो लेकिन क्या लगता है इस बार कौन-सी पार्टी जीतेगी?”फकीरा बोला
“जिसके पास नेता सबसे ज्यादा… भटकने से बचाने वाली रस्सी होगी।”जनता हँस पड़ी।
हर चुनाव में जनता नेता को पकड़कर रखती है, फिर नेता कुर्सी देखकर जनता को छोड़ देता है।फिर अगले चुनाव में वही नेता नई टोपी पहनकर वापस आ जाता है हालांकि हमारे प्रदेश के लोगों ने ऐसे नेताओं को अब लगभग ठुकरा सा दिया है!
चौपाल के एक किसान ने कहा:“फकीरा, तू तो बहुत घुमक्कड़ है घूमता रहता है, हर पार्टी के नेताओ  से राम-राम करता है और जनता के बीच भी रहता है तो बता ना… नेता लोग जनता के बीच कब आते हैं?”फकीरा बोला—
“जब उन्हें याद आता है कि वोटों का स्वाद बिना जनता के नहीं मिलता।”यह सुनकर सबके चेहरे पर देसी हंसी फैल गई।

हरियाणा के नेता और मौसम विभाग
फकीरा ने एक बार कुछ महीने पहले मौसम विभाग से पूछा था:“सर, हरियाणा में बारिश कब होगी?”वह बोले “पहले हमें ये बताओ कि इस हफ्ते कौन-सा नेता किस पार्टी में जाएगा। मौसम उसी पर निर्भर है।” मौसम विभाग भी यहाँ राजनीति से हारा बैठा है।क्योंकि हर 15 दिन में नया गठबंधन, नई दोस्ती, और नए वादों की बारिश हो जाती है।
नेताजी जी अस्वस्थ,जनता परेशान लेकिन इनकी खिली बाँछे….
राजनीति में भी कहते हैं कि कोई किसी का सगा नहीं है ऐसी बात कुछ बुजुर्गों और राजनीतिक दिग्गजों से हुई बातचीत में फकीरा को पता चली! फकीरा क्या जाने राजनीति और इस रंग बदलती दुनिया के रंग और ढंग क्योंकि फकीरा तो अपनी मस्ती में रहता है… राजनीतिक विश्लेषकों के बीच फकीरा जा पहुंचा तो एक ने कहा फकीरा नेता जी अब कैसे हैं? सुना है अब ठीक हो रहे हैं….चलो शुक्र है उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है यहां तो….. फकीरा ने अचरज भरी नजरों से पूछा यहां तो….. और कौन से नेताजी बीमार है? दूसरे लोग हंस पड़े और हंसते हुए बोले फकीरा तू भी ना बस….दोस्त मालूम है…हमारे प्रिय और शरीफ नेताजी पिछले दिनों अस्वस्थ हो गए थे हालत बिगड़ी और इलाज के लिए दूसरे शहर के बड़े-बड़े डॉक्टरो को दिखाना पड़ा, जनता अपने नेताजी के शीघ्र

स्वास्थ्य की दुआएं मांग रही थी, प्रभु से प्रार्थनाएं कर रही थी लेकिन नेताजी की पार्टी के ही लोग जिसे नेताजी परिवार कहते हैं… ओछी हरकतों पर उतर आए थे, उनकी तो बांछे ही खिल गई थी… पार्टी के एक बड़े नेता ने तो अपने खास सिपेसलारो को अब सब कुछ हमारा की बात कहते हुए मीटिंग तक कर ली थी तुझे पता नहीं क्या फकीरा? फकीरा बोला चाचा हम क्या जाने लोगों के मन की बातें क्योंकि लोग तो एक चेहरे पर कई कई चेहरे लगाए फिरते हैं और फिर जो अपने निजी स्वार्थ के लिए ऐसी घटिया हरकतों पर उतर आए तो वह तो इंसान ही नहीं फिर भी आप बताओ तो सही कि ऐसे नेता कौन है और कौन से नेताजी बीमार हैं तो सब हंस पड़े और बोले कि दिसंबर की इस सर्दी में गर्म चाय की प्याली पियो फकीरा और मस्त रहो क्योंकि जो करेंगे वह भरेंगे… अब फकीरा को भला ऐसे राजनीतिक विश्लेषकों की अंदरूनी बातों से क्या लेना फ़कीर ने गरम चाय की चुस्कियां लेने के पश्चात सबको जय राम जी की बोला और अपनी राह चल दिया हालांकि चलते चलते इन लोगों ने फकीरा को यह भी बताया कि फकीरा चिंता मत कर वह शरीफ नेताजी अब स्वस्थ नोट होकर फिर से जनता के बीच लौट आए हैं …. लेकिन सारे रास्ते फकीरा के दिमाग में उन लोगों द्वारा कहीं यह बात की शरीफ नेताजी के अस्वस्थ होने पर भी पार्टी के ही कुछ लोग किस प्रकार अपने राजनीतिक स्वार्थो की रोटियां सेंक रहे थे यही सोचता रहा कि क्या दुनिया में ऐसे भी लोग हैं…..

फकीरा का निष्कर्ष (आज की सीख)
चलते-चलते फकीरा आप से कहता है “नेता बदलते रहेंगे, वादे पलटते रहेंगे,लेकिन आपकी उम्मीदें और वोट की ताकत,अगर जागी रही—
तो एक दिन हरियाणा की राजनीति भी सुधर जाएगी।”
और अगर नहीं सुधरी,
तो फकीरा कल फिर किसी नई कहानी के साथ आएगा—
क्योंकि राजनीति और फकीरा की राह,दोनों कभी खत्म नहीं होती…बस चलते-चलते आगे बढ़ती रहती हैं।

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