हरियाणा की रातों रात बदलती राजनीति की दास्तान

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यमुना टाइम्स एक्सक्लूसिव: जाटलैंड की वफ़ादारी: हरियाणा की राजनीति में रातों-रात बदलते समीकरणों की दास्तान

यमुना टाइम्स ब्यूरो

चंडीगढ़/यमुनानगर (राकेश भारतीय ) हरियाणा की राजनीति को अगर एक शब्द में समझाया जाए तो शायद वह शब्द होगा“अनिश्चितता”और दो शब्द में“आया राम–गया राम”।
राज्य की राजनीतिक संस्कृति में यह परंपरा इतनी गहरी है कि कभी-कभी लगता है कि यहां मौसम की तरह नेता भी सुबह-शाम दो बार बदल जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जब कोई नेता रात को विरोधी दल पर बयान दे रहा था और सुबह उसी दल के नेताओं के साथ बैठकों में दिखाई दे रहा था।यह सिलसिला हर नए चुनाव के साथ और तेज हो जाता है।

वफ़ादारी की एक्सपायरी दही से भी कम!
हरियाणा में लोगों के बीच एक कहावत मशहूर है—“यहां वफ़ादारी की एक्सपायरी डेट दही से भी कम होती है!”और कई बार यह सच भी नज़र आता है। एक अनुभवी नेता ने कुछ दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बड़े चेहरे पर गंभीर आरोप लगाए।

अगली सुबह वही नेता उसी बड़े चेहरे के घर जाकर लड्डू खिलाता दिखाई दिया। दिवार पर बैनर लगा था“ग़लतफ़हमियां दूर हुईं… अब साथ मिलकर प्रदेश का विकास करेंगे।”लेकिन जनता ने यह तस्वीर देखकर जो रिएक्शन दिया, वह और भी दिलचस्प था—
“साहब, ग़लतफ़हमी दूर हुई या गणित सेट हुआ?”
सियासी ‘नेटवर्क पोर्टिंग


हरियाणा में पार्टी बदलना मोबाइल के नेटवर्क बदलने जैसा हो गया है।जहाँ सिग्नल अच्छा मिले—यानी सत्ता की संभावना ज़्यादा हो—
वहाँ नेता पोर्ट होकर पहुँच जाते हैं। राजनीति के विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति केवल वैचारिक अस्थिरता ही नहीं, बल्कि सत्ता के समीकरणों को लेकर नेताओं की तेज़ संवेदनशीलता दिखाती है।
हरियाणा की राजनीति में वैचारिक लाइनें अक्सर धुंधली पड़ जाती हैं और महत्त्वपूर्ण हो जाता है “कौन किसके साथ है और कब तक है।”

जनता का मज़ेदार रिएक्शन
सोशल मीडिया पर लोग इसे हंसी-मज़ाक के रूप में लेते हैं।कमेंट्स में लिखते हैं—
“हरियाणा में नेता नहीं बदलते… बस लोकेशन बदलती है।”और कुछ तो यह तक कह देते हैं—
“सिर्फ MLA नहीं—Most Lovable Asset भी!”राजनीति की असली तस्वीर हालांकि इन सबके बीच सच यह भी है कि हरियाणा की राजनीतिक ज़मीन बेहद सक्रिय, तेज़ और बदलते हालातों से भरी हुई है।किसी भी पार्टी का समीकरण किसी भी वक्त बदल सकता है और यही राज्य की सियासत को रोमांचक बनाता है।
राजनीतिक पंडितो का मानना है कि आने वाले महीनों में राज्य में गठबंधनों, समर्थन और समीकरणों में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हरियाणा की राजनीति है ही ऐसी —जहाँ नेताओं के कदम चुपचाप चलते हैं,और उनके निशान अगले दिन सुर्खियाँ बन जाते हैं।

 


हरियाणा हमें अब दल बदलने के अलावा एक और बात बड़ी तेजी से प्रचलित हो रही है नेता बदलना दरअसल अब कार्य करता भी नेताओं की राहों पर चल रहे हैं प्रदेश में राजनीतिक दलों के बड़े कार्यकर्ता अब पार्टी में ही रहकर अपना नेता बदलने लगे हैं! यमुनानगर में तो ऐसे कई उदाहरण है जब कार्यकर्ताओं ने रातों-रात पार्टी से निष्ठा तो नहीं बदली लेकिन अपने राजनितिक नेता से विश्वास डगमगा गया ऑल ड्राइंग रूम में सजी उनके नेताओं की तस्वीरो को तो बदल ही गया बल्कि हाजिरी भी नए नेता के दरबार में लगने लगी! जनता का मानना है कि अपने राजनीतिक सुधारो के लिए लोग नेता और पार्टी तो बदल ही रहे हैं लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं की शैली में भी बहुत बदलाव आ गया है पहले जन सेवा को माध्यम बनाकर नेता अपनी पहचान बनाते थे लेकिन अब जन सेवा गई बाढ़ में बस अपने पैसे के दम पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर या किसी बड़े नेता के आगमन पर पेसा फेंक तमाशा देख वाली नीति पर चलते हुए महंगे होटलों में बुलाकर अपने आप को जनसेवक के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाता है लेकिन यथार्थ के धरातल पर ऐसे नेताओं को हमेशा नकारा जाता रहा है और नकारे जाते रहेंगे! जनता के दिलों पर राज करने वाला उनकी हर समस्या को प्रशासन और सरकार के कानों तक पहुंचने वाला नेता भले ही किसी भी पार्टी का हो आज भी जनता के बीच लोकप्रिय बना हुआ है भले ही वह सत्ता में हो या विपक्ष में! बैराड़ देखना होगा कि हरियाणा में आया राम गया राम की राजनीति को कब विराम लगता है!

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