नेता जी चाय अच्छी हैं…चाय और कुर्सी की इंजीनियरिंग

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  • चाय और कुर्सी की इंजीनियरिंग

यमुना टाइम्स ब्यूरो

यमुनानगर (राकेश भारतीय) हरियाणा की राजनीति में एक कहावत बहुत चलती है—
“बड़े फैसले कभी बड़े कमरों में नहीं होते… ढाबे की चाय पर होते हैं।”

 

यमुनानगर के एक मशहूर ढाबे पर पिछले हफ्ते ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
दो बड़े विरोधी नेता, जो टीवी पर एक-दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते,
वही दो नेता अचानक एक ही टेबल पर बैठ गए।

चाय वाला भी घबरा गया।
बोला—“साहब, चाय कितनी मीठी रखूँ?”
दोनों नेताओं ने हंसते हुए कहा—
“जितनी मिठास पॉलिटिक्स में नहीं है… उतनी तो चाय में हो ही जाए!”

इसके बाद शुरू हुआ कुर्सी की इंजीनियरिंग का असली खेल।
चाय की हर सिप के साथ एक नया आंकड़ा,
एक नया समर्थन,
एक नया “अगर आप हमारे साथ…” टाइप फॉर्मूला निकल रहा था।

लोग वहां खड़े-खड़े बोल रहे थे—
“हरियाणा की सरकारें चाय के कप में ही बनती-बिगड़ती हैं!”

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