‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ की आड़ में सियासी जमावट?

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‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ की आड़ में सियासी जमावट?

यमुनानगर पहुंच रहीं कुमारी सैलजा, हुड्डा-सैलजा खींचतान फिर गरमाने के आसार

यमुनानगर। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा सांसद कुमारी सैलजा आज यमुनानगर दौरे पर हैं। आधिकारिक तौर पर उनका दौरा कांग्रेस के देशव्यापी अभियान ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के तहत बताया जा रहा है। दोपहर करीब 2 बजे कार्यकर्ताओं से संवाद और पत्रकार वार्ता का कार्यक्रम निर्धारित है।

लेकिन राजनीति में सिर्फ वही नहीं होता जो मंच से कहा जाता है। मंच पर ‘वोट बचाओ’ और सियासी गलियारों में ‘अपना खेमा बचाओ’ की चर्चा हो तो सवाल उठना लाजिमी है कि सैलजा का यह दौरा महज अभियान है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है?

क्या है ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान?

कांग्रेस की ओर से देशभर, खासकर हरियाणा में यह अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इसका उद्देश्य आम जनता और मतदाताओं को उनके संवैधानिक मताधिकार के प्रति जागरूक करना है। साथ ही मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर पार्टी द्वारा उठाए जा रहे सवालों को जनता तक पहुंचाना भी अभियान का हिस्सा है।

लेकिन सियासी पारा कहीं और तो नहीं चढ़ रहा?

आधिकारिक कार्यक्रम अपनी जगह है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सैलजा के यमुनानगर दौरे को लेकर चर्चाओं का बाजार कुछ ज्यादा ही गर्म है। इसे सैलजा खेमे के शक्ति प्रदर्शन से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

और वजह भी है—यमुनानगर को लंबे समय से सैलजा का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता रहा है।

यमुनानगर में सैलजा का मजबूत किला

जिले की कांग्रेस संगठनात्मक राजनीति में सैलजा समर्थक नेताओं की अच्छी पकड़ मानी जाती है। शहरी कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र कुमार और ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष नरपाल चौधरी का नाम भी सैलजा खेमे से जुड़े नेताओं में लिया जाता रहा है।

जिले में सतीश तेजली, श्याम सुंदर बत्रा, नरपाल चौधरी, पवन चोपड़ा और दर्शन लाल खेड़ा समेत कई ऐसे कांग्रेस नेता रहे हैं, जो लंबे समय से सैलजा के साथ राजनीतिक रूप से जुड़े माने जाते हैं।

राजनीति की विडंबना यह भी रही है कि कुछ चेहरे कांग्रेस के साथ रहे तो कुछ समय बाद राजनीतिक समीकरण बदलने पर पार्टी से भी दूरी बना ली। यही कारण है कि यमुनानगर की कांग्रेस राजनीति में सैलजा बनाम हुड्डा की खींचतान कोई नई कहानी नहीं है।

हुड्डा खेमे की चुनौती और सैलजा की पकड़

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाले खेमे और सैलजा समर्थकों के बीच संगठनात्मक व राजनीतिक वर्चस्व की खींचतान हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।

पिछले वर्ष भी जिले में कई राजनीतिक चेहरों के खेमे बदलने की चर्चाओं ने सियासी समीकरणों को गरमाया था। कुछ नेताओं के सैलजा खेमे के करीब आने को उनके राजनीतिक प्रभाव के विस्तार के तौर पर देखा गया।

जगाधरी के विधायक चौधरी अकरम खान भी सैलजा समर्थक खेमे के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।

रेणू बाला फैक्टर ने बढ़ाई सियासी गर्मी

इस पूरे दौरे को सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहा है साडौरा विधायक रेणू बाला का निलंबन।

रेणू बाला को भी सैलजा खेमे के करीब माना जाता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के भीतर गुटीय समीकरणों को लेकर यमुनानगर जिला खासा चर्चा में रहा था। हुड्डा खेमे की ओर से रमन त्यागी को मैदान में उतारने को भी कई राजनीतिक विश्लेषकों ने जिले में सियासी सेंध लगाने की कोशिश के रूप में देखा था।

हालांकि चुनाव परिणामों ने तस्वीर को पूरी तरह हुड्डा खेमे के पक्ष में नहीं जाने दिया। जिले की चार विधानसभा सीटों में से जगाधरी और साडौरा में कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। दोनों को सैलजा खेमे के करीब माना जाता रहा है।

बाद में साडौरा विधायक रेणू बाला को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया।

अब सवाल यही है कि रेणू बाला के निलंबन के ठीक बाद सैलजा का यमुनानगर दौरा क्या सिर्फ संयोग है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी है?

कार्यकर्ताओं से मुलाकात और पत्रकार वार्ता के दौरान क्या सैलजा इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगी? क्या वह रेणू बाला के मामले पर कोई संकेत देंगी? और क्या कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी पर भी कोई इशारा होगा?

आज दोपहर 2 बजे खुलेगा सियासी पिटारा

फिलहाल आधिकारिक एजेंडा ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ है, लेकिन यमुनानगर की सियासत में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सैलजा के शब्दों से ‘खेमा बचाओ’ की कोई नई कहानी निकलती है या नहीं।

क्योंकि कांग्रेस की हरियाणा वाली सियासत में वोट की गिनती से पहले खेमों की गिनती शुरू हो जाए तो खबर अपने आप बड़ी हो जाती है।

अब देखना यह है कि दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैलजा सिर्फ वोट की बात करती हैं या यमुनानगर से कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को भी कोई नया संदेश देती हैं।

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