घर वापसी से गरमाई हरियाणा की राजनीति: चौधरी महिपाल और ऋषिपाल कल्याण थामेंगे इनेलो का दामन

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घर वापसी से गरमाई हरियाणा की राजनीति: चौधरी महिपाल और ऋषिपाल कल्याण थामेंगे इनेलो का दामन

यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर( राकेश भारतीय ) हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। प्रदेश में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) द्वारा चलाए जा रहे “घर वापसी अभियान” को उस समय बड़ी मजबूती मिलने जा रही है जब यमुनानगर के दो चर्चित और प्रभावशाली चेहरे चौधरी महिपाल सिंह भगवानगढ़ और हरियाणा कल्याण मंच के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिपाल कल्याण पुनः इनेलो परिवार का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
दोनों नेताओं को इनेलो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एवं पूर्व विधायक अभय सिंह चौटाला तथा प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा पार्टी का पटका पहनाकर औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल करेंगे।
ताऊ देवीलाल की विचारधारा से जुड़ा रहा महिपाल चोधरी का सफर
चौधरी महिपाल सिंह भगवानगढ़ का नाम यमुनानगर जिले की राजनीति में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। ताऊ देवीलाल की नीतियों और किसान हितैषी सोच से प्रभावित होकर उन्होंने समता पार्टी, जनता दल और बाद में इनेलो के साथ लंबे समय तक सक्रिय राजनीति की। एक दौर ऐसा भी रहा जब जिले में उनकी राजनीतिक पकड़ और जनाधार को देखते हुए लोग कहते थे कि “महिपाल का सिक्का चलता है।”
हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों और मतभेदों के चलते उन्होंने इनेलो से दूरी बना ली थी और बाद में बहुजन समाज पार्टी सहित अन्य राजनीतिक मंचों पर सक्रिय रहे। किसान, मजदूर और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने के कारण उनकी अलग पहचान बनी रही।
समाज सेवा से राजनीति तक ऋषिपाल कल्याण की मजबूत पहचान
वहीं हरियाणा कल्याण मंच के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिपाल कल्याण भी लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों और जनहित के मुद्दों पर मुखर रहे हैं। शिक्षा, सामाजिक न्याय, युवा हितों और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर उन्होंने समय-समय पर आवाज उठाई। क्षेत्र में उनकी छवि एक सक्रिय समाजसेवी और जनसरोकारों से जुड़े व्यक्ति की रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऋषिपाल कल्याण के इनेलो में आने से पार्टी को सामाजिक संगठनों और जागरूक वर्गों के बीच नई ऊर्जा मिल सकती है।
क्या इनेलो फिर हासिल कर पाएगी पुराना जनाधार?
हरियाणा की राजनीति में कभी इनेलो एक मजबूत ताकत मानी जाती थी। ताऊ देवीलाल और चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के दौर में पार्टी का ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों और कर्मचारियों के बीच व्यापक प्रभाव था। पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक समीकरण बदलने और नए दलों के उभार के कारण इनेलो का जनाधार प्रभावित हुआ, लेकिन अब पार्टी लगातार पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी अपने पुराने जनाधार को पुनर्गठित करने में सफल रहती है और युवा नेतृत्व तथा जमीनी मुद्दों को मजबूती से उठाती है, तो आने वाले चुनावों में वह फिर से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
महिपाल आर्य और ऋषिपाल कल्याण जैसे प्रभावशाली नेताओं की वापसी को केवल दो नेताओं का दल बदल नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे इनेलो के संगठनात्मक पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। खासकर यमुनानगर और आसपास के क्षेत्रों में इस घटनाक्रम ने राजनीतिक चर्चाओं को नया विषय दे दिया है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि इनेलो का यह “घर वापसी अभियान” आने वाले दिनों में कितने और पुराने नेताओं को वापस जोड़ पाता है तथा क्या यह अभियान पार्टी को प्रदेश की राजनीति में फिर से मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर पाएगा।
फिलहाल इतना तय है कि पुराने साथियों की वापसी ने हरियाणा की राजनीतिक फिजा में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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