जब केंद्र सरकार बढ़ा रही संवाद, तो स्थानीय स्तर पर क्यों बढ़ रही दूरियां?
“वार्तालाप” का संदेश और स्थानीय हकीकत, पत्रकारों के बीच छिड़ी बहस
सरकार और मीडिया के बीच समन्वय की बात, लेकिन स्थानीय स्तर पर संवादहीनता क्यों?
पीआईबी ने कहा “मीडिया सादर आमंत्रित”, यमुनानगर में पत्रकार पूछ रहे- आखिर स्थानीय स्तर पर दूरी क्यों?
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर, 29 जून ( राकेश भारतीय ) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा 30 जून को आयोजित होने वाली मीडिया वर्कशॉप “वार्तालाप” के निमंत्रण पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “मीडिया कर्मियों को कार्यशाला की कवरेज के लिए सादर आमंत्रित किया जाता है।” इतना ही नहीं, कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भी सरकार और मीडिया के बीच समन्वय स्थापित करना बताया गया है।
लेकिन यमुनानगर में पत्रकारों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि जब केंद्र सरकार स्वयं मीडिया और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने के लिए “वार्तालाप” जैसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है, तो स्थानीय स्तर पर पत्रकारों के साथ संवादहीनता क्यों दिखाई दे रही है?

पत्रकारों का कहना है कि जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा संचालित व्हाट्सएप समूह एकतरफा संचार का माध्यम बनकर रह गया है। इस समूह में केवल विभाग की ओर से संदेश प्रसारित किए जाते हैं, जबकि पत्रकार न तो किसी सूचना पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं और न ही कोई प्रश्न पूछ सकते हैं।
पत्रकारों के एक वर्ग का मानना है कि मीडिया केवल खबरें प्रकाशित करने का माध्यम नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच एक मजबूत पुल का काम करता है। ऐसे में संवाद की बजाय एकतरफा सूचना प्रणाली कई सवाल खड़े कर रही है।
गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री स्वयं को “प्रधान सेवक” बताते हैं और सरकार लगातार जनभागीदारी एवं संवाद को प्राथमिकता देने की बात करती रही है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पत्रकारों के साथ संवाद की कमी और औपचारिक निमंत्रण की परंपरा में बदलाव को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कई वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि यदि सरकार और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है तो संवाद के सभी रास्ते खुले रहने चाहिए। पत्रकारों का सम्मान और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने का कार्य करता है।
अब देखना यह होगा कि क्या “वार्तालाप” कार्यशाला वास्तव में सरकार और स्थानीय मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक नई शुरुआत साबित होगी, या फिर पत्रकारों के मन में उठ रहे सवाल यूं ही बने रहेंगे।
(इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)











