एप्स्टीन फाइल्स : 19 दिसंबर की तारीख, उड़ती अफ़वाहें और छुपा हुआ सच
स्पेशल रिपोर्ट
डिजिटल डेस्क
यमुना टाइम्स ब्यूरो
चंडीगढ़ ( राकेश भारतीय )
19 दिसंबर…
सोशल मीडिया पर यह तारीख जैसे कोई तूफ़ान बनकर छा गई है। दावे हो रहे हैं कि दुनिया के बड़े-बड़े चेहरे बेनकाब होने वाले हैं। कहा जा रहा है कि लंदन से लेकर अमेरिका तक प्राइवेट जेट्स उड़ रहे हैं,और ताकतवर लोग “एप्स्टीन फाइल्स” के डर से ठिकाने बदल रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है —
क्या सच में कोई भूचाल आने वाला है?
या फिर यह एक और वायरल भ्रम है?
यमुना टाइम्स हमेशा अपनी टैगलाइन जो सही खबर वही पर चलते हुए अपने दश को अपने पथ को तक सही जानकारी पहुंचाने का दायित्व अपनी बात आ रहा है और निभाते रहेगा इसलिए आज का हमारा यह लेख इसी विषय पर रहेगा ।
सबसे पहले समझिए — एप्स्टीन फाइल्स क्या हैं?
जेफ़्री एप्स्टीन,अमेरिका का एक अरबपति फाइनेंसर,जिस पर नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग और
ताकतवर लोगों के लिए देह-शोषण नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप लगे 2019 में जेल में उसकी मौत हो गई,
लेकिन उसके साथ जुड़े सवाल आज भी ज़िंदा हैं।
“एप्स्टीन फाइल्स” कोई एक फाइल नहीं, बल्कि:कोर्ट के गोपनीय दस्तावेज,पीड़ितों के बयान है ।फ्लाइट लॉग्स (Epstein का प्राइवेट जेट),ई-मेल्स और संपर्क सूचियाँ,इनमें कई राजनीतिक, कारोबारी और ग्लैमर जगत से जुड़े नामों का उल्लेख है।
क्या नाम आने का मतलब अपराधी होना है?
यहीं सबसे बड़ा भ्रम पैदा किया जा रहा है।किसी फाइल में नाम होना और अपराध सिद्ध होना दोनों में बहुत बड़ा अंतर है।कई नाम सिर्फ संपर्क में होने, किसी कार्यक्रम में मिलने,या यात्रा करनेके कारण दर्ज हैं।कानूनी रूप से अपराध तभी माना जाता है जब सबूतों को देखते हुए अदालत का फैसला हो।
लंदन में भगदड़ और 90 प्राइवेट फ्लाइट्स का सच:सोशल मीडिया पर दावा है कि:90 प्राइवेट जेट्स अचानक सक्रिय हुए,लोग देश छोड़कर भाग रहे हैं
लेकिन अब तक किसी भी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया,एयरपोर्ट अथॉरिटी या सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है। यह दावा फिलहाल अफवाहों की श्रेणी में आता है।
19 दिसंबर को क्या होने वाला है?
सच यह है कि: कुछ कोर्ट दस्तावेज़ पहले ही सार्वजनिक हो चुके हैं और
आगे भी कानूनी प्रक्रिया के तहत फाइलें खुल सकती हैं,लेकिन:“गुनहगारों की फोटो लिस्ट”,“सभी बड़े नाम एक्सपोज़”
“तुरंत गिरफ्तारी”आदि इन दावों पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
तो फिर इतना शोर क्यों?क्योंकि: Epstein केस में पहले भी कई सवाल दबे,सिस्टम पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ,सोशल मीडिया सस्पेंस को तेजी से फैलाता है और इसी माहौल में
अधूरी जानकारी पूरी सच्चाई बनकर वायरल हो जाती है।
यमुना टाइम्स का निष्कर्ष
एप्स्टीन केस वास्तविक है, गंभीर है और शर्मनाक भी,लेकिन फिलहाल जो डर और भगदड़ की तस्वीर पेश की जा रही है,वह तथ्यों से ज़्यादा अफवाहों पर आधारित है। सच सामने आए — यह ज़रूरी है,लेकिन सच और सनसनी में फर्क करना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी।


















