यहां वोट नहीं… किसानों के दिल के खून का कतरा कतरा होता है चोरी..

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यहां वोट नहीं… किसानों के दिल के खून का कतरा कतरा होता है चोरी..( अंतिम भाग )

धान घोटाला — यमुनानगर में करोड़ों का खेल

धान घोटाले को लेकर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का बड़ा बयान

आखिर जांच कहाँ फँसती है? जिम्मेदारी कैसे तय होगी?

यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर (राकेश भारतीय ) प्रदेश के विभिन्न जिलों में वन टू का फोर करने वाले धान घोटाले से जुड़े माफिया के लोग बेखौफ अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं लेकिन इन पर लगाम लगाने वाला लगता है कोई नहीं है! दूसरी ओर यमुना टाइम्स द्वारा प्रमुखता से उठाए गए धान घोटाले को लेकर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का बड़ा बयान सामने आया है जिसे हम आपको सुनाएंगे लेकिन पहले सीरीज का अंतिम भाग!!

प्रदेश के करनाल, सोनीपत,पानीपत और अन्य जिलों में सरकार के कुछ ईमानदार अफसरो की बदौलत हुई कार्रवाई के पश्चात करोडो अरबों का घोटाला सामने आया है जिसमें यमुनानगर में ही अरबो रुपए का घोटाला किया गया है!
यमुना टाइम्स के कई दर्शकों और पाठको ने फोन करके जानना चाहा है कि आखिर यह जांच होती कैसी है कही लू पोल तो नहीं है?तो हम बता दे कि जांच सबसे पहले कागज़ों से शुरू होती है किसानों का दिल उनकी फैसले होती है तथा धन घोटाले के आरोपी धान की चोरी करके उनकी फसलों की चोरी करके किसानों के दिल के खून का कतरा कतरा निकाल लेते हैं स्टॉक रजिस्टर,मिलिंग रिटर्न,गेट पास,ट्रक नंबर,तौल पर्ची, सैंपल रिपोर्ट
सबकी तुलना असली मैदान में मौजूद स्टॉक से की जाती है।यहीं सबसे बड़े भेद खुलते हैं। ईमानदार अफसरो की मेहनत का ही फल है कि 4 जगहों पर ज्यादा फर्जीवाड़ा मिलता है खरीदी केंद्रों पर बोरा कम भरा, कागजों में पूरा 500 बोरा आया, 700 बोरा चढ़ा दिया जबकि ट्रांसपोर्ट में ट्रक कभी भेजा ही नहीं गया होता, पर रजिस्टर में एंट्री होती है। मिल में कम धान दिखाकर सरकार को कम चावल वापस करते हैं।क्वालिटी रिपोर्ट मे A ग्रेड लिखा होता है—अंदर खराब धान मिला हुआ होता है। यह भी बताना चाहते हैं कि जिम्मेदारी तय होने पर कौन फंसता है?केंद्र का कर्मचारी
कम तौल, गलत बोरी, फर्जी रजिस्टर, मिल मालिक सरकारी धान बाजार में बेचना फर्जी मिलिंग रिटर्न,रात में ट्रक लोडिंग यमुनानगर में जो घोटाला हुआ है उसमें मिल मालिक पर घोटाला करने के आरोप लगे हैं! जबकि कई बार जांच में सरकारी अधिकारी भी फंसते हैं क्योंकि सरकारी अधिकारी फाइलें रोकना, रिपोर्ट पास करना, स्टॉक न गिनना आदि मुख्य कार्य रहते हैं! कार्रवाई के प्रकार तत्काल निलंबन, विजिलेंस fir, करोड़ों की रिकवरी, मिल लाइसेंस रद्द, विभागीय चार्जशीट!

कैसे खुलती है घोटाले की परतें ?

घोटालेबाज अपने काम को बहुत ही चालाकी से अंजाम देते हैं लेकिन इसके बावजूद यदि थोड़ी सी सतर्कता बरती जाए तो घोटाले सामने आ सकते हैं दो चीजें सबसे ज्यादा असर करती हैं सूचना का अधिकार( RTI) जिसमें रिकॉर्ड खुलते ही खेल सामने आ जाता है। जबकि दूसरा है मीडिया और जनता का दबाव….बता दे कि फाइलें महीनों बंद रहती हैं लेकिन जब जनता दबाव डालती है तब ही जांच आगे बढ़ती है। मीडिया के लोगों पर इन दिनों इतना दबाव रहता है कि संस्थान द्वारा दिया कार्य भी संसाधन कम होने के कारण वह पूरा नहीं कर पाते रोजमर्रा की बैठके, बीट पर दी जाने वाली स्टोरी खबरें, कोई समाचार ना छूटे इसके लिए अपनी अपनी बीतस पर रिपोर्टर की पैनी नजर, नियमित संबंधित विभाग में जाना और इसके अतिरिक्त कई दबाव रहते हैं और यदि कोई रिपोर्टर इस तरह की खोजी पत्रकारिता करके घोटाला सामने लाता भी है तो कई बार पक्ष न मिलने के चलते और कई बार स्पेस के कारण उसकी स्टोरी kill हो जाती है इसलिए आम जनता के साथ-साथ सोशल मीडिया पर कार्यरत इन्फ्लुएंसरस का भी कर्तव्य बनता है कि वह केंद्रों की वीडियो,रात में ट्रक लोडिंग की तस्वीरें,RTI में गेट पास, MR, स्टॉक रजिस्टर की कॉपी एकत्रित करने के साथ-साथ जिला पोर्टल पर लिखित शिकायत करे,विजिलेंस में ऑनलाइन शिकायत करें क्योंकि यह देश सबका है और हम सब का कर्तव्य बनता है कि अपने देश के लिए जो भी बन सके अवश्य करें!

बता दे कि हमने विस्तार से बताया था कि किस प्रकार यमुनानगर में बड़े पैमाने पर धान घोटाला किया जा रहा है कई मिल मालिक भी इसमें शामिल है और जो भी आवाज उठाता है उसे हर तरह से मैनेज कर लिए जाता है! चर्चा यह भी है कि कुछ अधिकारियों को तो एक मिल मालिक यमुनानगर में बनाए अपने रेस्टोरेंट में ले जाकर सेवा पानी करने के साथ-साथ उनकी खूब आव भगत करता है और नैतिकता की सारी सीमाएं यहां लाघी जाती हैं! हालांकि यह भी बता दे कि यमुनानगर में धान घोटाला किसी एक व्यक्ति का खेल नहीं बल्कि एक पूरे संगठित नेटवर्क का नतीजा है। यह नेटवर्क तीन जगहों से बनता है — खरीदी केंद्र, तौल केंद्र, और राइस मिल। किसान के धान को नमी ज्यादा दिखाकर रेट काटना,वास्तव में खराब धान को कागज़ पर प्राइम क्वालिटी बना देना,दलाल अपना धान किसान के नाम से बेच देते हैं! कई जगह “कागज़ों पर धान” खरीद लिया जाता है जबकि मैदान में बोरियां होती ही नहीं,यहां से ही फर्जीवाड़े की पहली ईंट रखी जाती है। इसके अतिरिक्त वजन में भी खेल होता हैं! असली तौल मशीन सेटिंग से पहले ही ‘हेरफेर’ कर दी जाती है! 40 किलो धान तौला जाता है लेकिन बोरी में केवल 36–37 किलो होता है! “कम तौल” का फायदा सीधे खरीद केंद्र कर्मचारी व दलाल उठाते हैं! इसके अतिरिक्त बोरी और रिकॉर्ड में भी फर्जीवाड़ा किया जाता है जिसमें 500 बोरी धान आया—रिकॉर्ड में 650 बोरी चढ़ा दीजाती हैं,100 बोरी धान खराब था—उसे स्क्रैप दिखा कर निजी जगह भेज दिया इसके अलावा कई केंद्रों पर धान की बोरियाँ दिखाने के लिए रखी जाती हैं, असली खेल रात में होता है! धान का गैरकानूनी ट्रांसफर भी किया जाता है जिसमें किसानों के धान को रात में ट्रकों में भरकर अन्य जिलों/राज्यों में बेचा जाता है! केंद्रों के आसपास उसी रात ट्रक-ट्रेलर देखकर लोग समझ जाते हैं कि “काम” चल रहा है इससे किसानो को भुगतान कम किया जाता है जबकि सरकार को स्टॉक गायब होने का करोड़ों नुकसान पहुंचता है!
धान घोटाले का महाकेंद्र है राइस मिल। पूरा फायदा यहीं से निकलता है।
सरकार का धान, बाजार में बेच देते हैं मिल के पास जितना धान पहुंचता है, उसमें से एक हिस्सा “कागज पर मिलिंग” दिखाते हैं,असली धान को ओपन मार्केट में महंगे दाम पर बेच देते हैं इसके अलावा मिलिंग रिटर्न (MR) में भी सबसे बड़ा खेल खेला जाता है, सरकार को 100 बोरी धान भेजते हैं,कागज पर 62 बोरी चावल वापस दिखा देते हैं,लेकिन असली में उतना चावल कभी निकलता ही नहीं।
MR रिपोर्ट सबसे ज्यादा फर्जी होती हैं घटिया चावल बनाकर सरकारी स्कीमों में भेजना,खराब धान मिलाते हैं,टूटा चावल, पुराना चावल, या नकली मिश्रित चावल इसे ‘A ग्रेड’ बनाकर सरकारी स्कीमों (PDS, मिड-डे मील) में भेज देते हैं! पर्ची बड़ा करने वालों का पेट इतने में ही नहीं भरता बल्कि नमी और क्वालिटी में फर्जी रिपोर्ट तक बनवा दी जाती है! क्वालिटी इंस्पेक्टर को पहले ही बता दिया जाता है
“सैंपल पास कर देना, बाकी हम देख लेंगे।”
मिल मालिक + अधिकारी + दलाल = एक तिकड़ी
यमुना टाइम्स को मिली शिकायतों के अनुसार चंद बिल मालिक कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों के साथ मिलकर अपने नेटवर्क को चलते हैं! यही तीनो मिलकर स्टॉक बढ़ाते हैं,धान गायब करते हैं,मिलिंग धीमी दिखाते हैं,फर्जी रिपोर्ट दाखिल करते हैं जानकारों का कहना है कि इस तिकड़ी के बिना धान घोटाला संभव ही नहीं।

अंतिम निष्कर्ष

“धान घोटाला सिस्टम की गलती नहीं—सिस्टम के भीतर मौजूद गिरोह की सफलता है।
लेकिन जब सवाल उठते हैं, रिकॉर्ड मांगे जाते हैं, फाइलें खुलती हैं—
तो हर धान की बोरी अपना सच बोलती है।”
इस सीरीज का आज हम समापन कर रहे हैं! इसी बीच धान घोटाले पर प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का बड़ा बयान सामने आया है आप भी सुनें क्या बोले कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा:

 

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