किसकी गुंडागर्दी पर पीड़िता के अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट तक बदल दी गई…. जांच कमेटी पहुंची
यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर (राकेश भारतीय) मरीज के पेट में पट्टी छोड़ने के मामले में जांच कमेटी यमुनानगर पहुंची ।मरीज के पेट में पट्टी छोड़ने के मामले में जांच कमेटी मैं स्वस्थ अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी इस विषय में बातचीत की।

यमुनानगर में जांच कमेटी के पहुंचने पर यह खबर पूरे जिले में जंगल की आग की तरह फैल गई। कुछ लोगों का कहना था कि सरकार इसी प्रकार यदि सख्ती दिखाएं तो निश्चय ही लापरवाह डॉक्टर पर शिकंजा कसा जा सकता है जबकि कुछ लोगों का कहना था की जांच कमेटी केवल आईवाश करने आई है तथा इस मामले पर लीपा पोती कर दी जाएगी।
बता दे कि पिछले दिनों एस पी अस्पताल में डॉक्टर ने गर्भवती मरीज के पेट में पट्टी छोड़ दी थी और इस मामले में काफी विरोध भी हुआ था।आरोप लगा था कि एस पी अस्पताल के डॉक्टर ने सिजेरियन डिलीवरी करते हुए
पेट में सर्जिकल
पट्टी छोड़ दी। यह आरोप लगाते हुए महिला के परिजनों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया था। साथ ही डीसी को शिकायत देकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। डीसी ने कमेटी बनाकर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया था।
बीबीपुर गांव निवासी ओसामा ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए आरोप लगाया था कि 12 मार्च को वह अपनी गर्भवती पत्नी मेहर खातून को जगाधरी के एक निजी अस्पताल में 12 मार्च को लेकर गया था। 13 मार्च को अस्पताल की महिला डॉक्टर व उसके पति ने सिजेरियन ऑप्रेशन किया। पत्नी ने बेटे को जन्म दिया। 15 मार्च को अस्पताल से छुट्टी करवा वह घर चले गए। कुछ दिन बाद पेट में दर्द होने के कारण वह एक अप्रैल को पत्नी को बूड़िया के एक निजी अस्पताल में लेकर गया।
डॉक्टर ने उसका अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। वह जगाधरी के ही एक अल्ट्रासाउंड केंद्र में गया जहां रेडियोलॉजिस्ट ने उन्हें सारी बात न बताकर उस डॉक्टर से बात की जहां डिलीवरी हुई थी। उन्हें बताया गया कि पेट में लगे टांकों में मामूली पस पड़ी है। 18 अप्रैल तक उसका बूड़िया के ही अस्पताल में उपचार चला। छुट्टी से एक दिन पहले वह यमुनानगर के मॉडल टाउन स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र में गए।
यहां भी उन्हें सारी बात न बताकर आरोपी डॉक्टर से बात करने के बाद नार्मल रिपोर्ट दी गई। उन्हें बताया गया कि उसकी पत्नी की यूट्रेस में गैस बनी हुई है। बूड़िया में चेकअप कराने पर डॉक्टर ने उन्हें सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। जिस पर वह मॉडल टाउन में फिर उसी केंद्र में गए। रिपोर्ट में उन्हें बताया गया कि यूट्रेस में पस पड़ने से रसौली बन चुकी है। इसलिए वह इसका ऑप्रेशन वहीं करवा लें जहां डिलीवरी हुई थी। ओसामा ने बताया था कि जब उन्होंने उस अस्पताल में जाने से मना किया तो रेडियोलॉजिस्ट ने उसे शहर के ही एक अन्य अस्पताल में भेज दिया। अस्पताल में पहुंचने पर पता चला कि वहां पर पहले से ही ऑप्रेशन की तैयारी थी। उन्हें कुछ शक हुआ तो वह पत्नी को पंचकूला के निजी अस्पताल में लेकर गया। जहां सारे टेस्ट करने के बाद बताया गया कि मेहर खातून के पेट में सर्जिकल कॉटन पट्टी सिजेरियन ऑप्रेशन के दौरान छोड़ी गई है। 24 मई को डॉक्टर ने उसकी आंत काट कर ऑप्रेशन से पट्टी को बाहर निकाला। तीन माह बाद ऑप्रेशन कर आंत को जोड़ा जाएगा। परिजनों ने आरोप लगाया था कि अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों ने डिलीवरी करने वाली डॉक्टर व उसके पति को बचाने के लिए उन्हें सारी नॉर्मल रिपोर्ट दी।
महिला के परिजनों ने शिकायत दी थी।
यमुनानगर में आज पहुंची जांच कमेटी ने एडवोकेट साहब सिंह और किसान नेता जिन्होंने मरीज को गुमराह करने तथा उसकी जान दाव पर लगाने के आरोपी निजी अस्पताल के विरुद्ध आवाज उठाते हुए जांच कमेटी बिठाने की मांग की थी से भी बातचीत की। साहब सिंह और हरपाल सुढल ने कहा कि वह किसी से भी ना तो अन्य होने देंगे और ना ही किसी की गुंडागर्दी चलने देंगे। इस संबंध में हमें एसपी अस्पताल प्रबंधन का पक्ष पता नहीं चल पाया।














