यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर (राकेश भारतीय ) खून पसीने से कमाया पैसा व्यक्ति को कितना सुकून देता है और उसी पैसे में से अपने खर्चो और अपनी जरूरतो मैं कटौती कर अपने स्वर्णिम भविष्य के लिए पाई पाई जोड़ी गई राशि तो हर मनुष्य विशेष कर मध्यमवर्गीय लोगों के लिए ऑक्सीजन का काम करती है।
हर कोई सोचता है कि जोड़ी गई राशि उसके संकट काल में या वृद्धा अवस्था में काम आएगी लेकिन यदि उस राशि को चोर, बदमाश, लुटेरे या ठग शातिर बाजी से ठग ले तो आदमी के पांव तले की जमीन निकल जाती है। यमुना टाइम्स की टीम का लक्ष्य केवल अपने दर्शकों और पाठकों तक खबरें पहुंचाना नहीं है बल्कि उनके स्वर्णिम भविष्य की नींव को मजबूत करने के लिए जागरूक करना भी यमुना टाइम्स का कर्तव्य है। हम आज आपसे गुजरात के राजकोट में एक बुज़ुर्ग दंपति के साथ हुई ऑनलाइन धोखाधड़ी मामले की बात कर रहे हैं।
आशा है एक जागरूक नागरिक होने के कारण आप इस खबर के बारे में जानते होंगे लेकिन फिर भी यदि आपको नहीं पता तो संक्षिप्त में हम आपको वह खबर बता रहे है। यमुना टाइम्स आप सबसे अपील करता है कि कभी भी किसी का फोन आने पर घबराय नहीं क्योंकि पुलिस या अधिकारी कभी फोन करके आपसे पैसे नहीं मांगते। अपने दोस्तों से अपने रिश्तेदारों से या पुलिस से इस संबंध में बात कीजिए। तो चलो हम बात करते हैं इस घटना की।
मामले का घटनाक्रम — विस्तार से
पीड़ित:
दिनेश दलवाडिया (69 वर्ष), जो 2013 में राजकोट सेशंस कोर्ट से रिटायर्ड हुए थे, और उनकी पत्नी अनीता दलवाडिया ।
ठगी का तरीका (कैसे किया गया):
1. दिनेश को वॉट्सऐप पर एक कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को “टेलिकॉम डिपार्टमेंट” का अधिकारी बताया।
2. फिर उन्हें एक Sunilkumar Gautam नामक व्यक्ति से बात करने के लिए कहा गया, जिसने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया।
3. आरोप लगाया गया कि एक बैंक मैनेजर ने गिरफ्तारी से पहले सुप्रीम कोर्ट में बयान दिया कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग से प्राप्त अवैध राशि दलवाडिया के खाते में ट्रांसफर की थी।
4. आरोपियों ने बताया कि आरोपी बैंक मैनेजर से 8 करोड़ रुपये नकद, 180 पासबुक, कई कार्ड और ड्रग्स बरामद हुए हैं, और दलवाडिया को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
5. दबाव बनाने के लिए, आरोपियों ने वॉट्सऐप पर गिरफ्तारी की staged तस्वीरें भी भेजीं और डराने-धमकाने लगे कि अगर सहयोग नहीं मिला तो उम्रकैद हो जाएगी ।
धोखाधड़ी की सीमा:
प्रारंभ में 8 लाख रुपये “वेरिफिकेशन” के नाम पर बैंक खाते में जमा करने को कहा गया।
फिर उन्हें अपनी सोने की ज्वेलरी गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने और उसका पैसा ट्रांसफर करने को कहा गया—27 लाख रुपये उन्होंने इस तरह ट्रांसफर किए।
40 दिनों तक लगातार उन्हें डराकर, वे अपनी शीघ्र निकासी योग्य जमा (FDs), बैंक खाते और अन्य धन परिग्रहण कराकर कुल ₹88.50 लाख ट्रांसफर कर बैठे ।
प्रतिक्रिया और पुलिस कार्रवाई:
18 अगस्त को National Cybercrime Reporting Portal (NCRP) पर यह मामला रिपोर्ट किया गया।
24 अगस्त को साइबरक्राइम पुलिस स्टेशन में औपचारिक FIR दर्ज कराई गई।
पुलिस ने भुवनगर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया:
Brijesh Patel, जिनका बैंक खाता धोखेबाजों को इस्तेमाल करने के लिए “रेंट पर” दिया गया था (₹10 लाख जमा हुए थे उस खाते में)।
Mohsin Sheikh और Mohamad Halari, जिन्होंने “अंगाड़िया” (hawala जैसे पारंपरिक) सेवाओं के जरिए पैसे स्थानांतरित करने की व्यवस्था की थी।
यह गिरोह कई राज्यों में NCRP के माध्यम से दर्ज शिकायतों से जुड़ा हुआ पाया गया है; पुलिस अभी मुख्य गैंगस्टर तक पहुँचने के लिए जांच जारी रखे हुए है ।
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निष्कर्ष
एक रिटायर्ड कोर्ट क्लर्क, जो कानून और कानूनी प्रक्रियाओं से परिचित हैं, फिर भी उच्च तकनीकी और भावनात्मक दबावों का शिकार हो गए। धोखेबाजों ने धोखे से सोशल इंजीनियरिंग, व्हाट्सऐप वीडियो, नकली दस्तावेज़ और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे खौफ पैदा करने वाले दावे करके ₹88.50 लाख का भारी नुकसान कराया। पुलिस ने शुरुआती आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन ठगी के मूल दोषियों की पहचान अभी बाकी है।
















