नए नियमों में प्राईवेट कॉलेजों के छात्रों की डिग्री आईसीएआर प्रमाणित न मानने से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर

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अम्बाला
प्राईवेट कॉलेजों से पास आउट छात्रों की डिग्री अब आईसीएआर प्रमाणित नहीं मानी जाएगी। नियमों में किए गए इस संशोधन से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। जिसके चलते सरकार एवं हरियाणा लोक सेवा आयोग से महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय, सद्दोपुर, अंबाला के कृषि विज्ञान में स्नातक कर रहे छात्रों ने अनुरोध किया है कि हरियाणा लोक  सेवा आयोग द्वारा होने वाली कृषि विकास अधिकारियों (एडीओ) की भर्ती के लिए पात्रता में संशोधन न किया जाए।
गौरतलब है कि हरियाणा में 11 आईसीएआर असंबद्ध कृषि विश्वविद्यालय हैं, जिनमें पढ़ रहे हजारों बच्चों का भविष्य इस नए संशोधन के कारण दांव पर लगा है। एडीओ की भर्ती वर्ष 2012 में 500 पदों पर निकली थी और उसके बाद वर्ष 2021 में 526 एडीओ भर्तियां निकली हैं। एडीओ के 526 पदों पर करीब 20,000 हजार आवेदन आए हैं और इस संशोधन के बाद 18,000 युवक एडीओ की भर्ती की पात्रता से बाहर होते नजर आ रहे हैं।
इस सब पर तान्या वर्मा, नवजोत कौर, अंचल राणा, सानू शर्मा,  राहुल गिरि आदि छात्रों का कहना है कि जब हमने प्राईवेट कॉलेज में दाखिला लिया था तब हमें आश्वासन दिलाया गया था कि हम सबको आईसीएआर प्रमाणित डिग्री देंगे। पर यह बातें कहीं दब कर रह गई। जिसके कारण हमें आईसीएआर प्रमाणित कॉलेज में एम.एस.सी. में दाखिला मिल नहीं रहा है और ही हाल ही में आए हरियाणा कृषि विभाग के इस नए संशोधन ने हमारी डिग्री को सिर्फ कागज का एक टुकड़ा बनाकर रख दिया है। सभी छात्रों को सरकार से सवाल है कि अगर सरकार को नए नियम लाने ही थे तो इस प्राईवेट कॉलेजों को खोलने  का लाईसेंस ही क्यों दिया?  और अगर लाईसेंस दिया है तो हमें समान मौके मिलने चाहिए। अगर हम काबिल नहीं हैं तो हम बाहर हो जाएँगे, अगर काबिल हैं तो हम भी इस पद के लिए उचित स्थान रखते हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए परिजनों द्वारा जमा की गई स्नातक डिग्री की मंहगी फीस व छात्रों के 4 साल व्यर्थ ही हैं। सरकार व प्राईवेट संस्थानों ने शिक्षा को कमाई का साधन समझ रखा है। जिसके चलते भविष्य में छात्रों  को बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। छात्रों के पास आगे चलकर भविष्य में कोई विकल्प नहीं है। पहले ही हमारे जैसे हजारों छात्र झूठे आश्वासन के कारण भ्रमित हो चुके हैं। पर अब हम अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे और कॉलेजों की तरफ से आने वाले झूठे फरमानों की पूरी पड़ताल के साथ अपनी मुहिम पर अड़े रहेंगे। बस हम सभी छात्रों का अनुरोध है कि ये संशोधन करके राज्य के हजारों विद्याथिर्यों के भविष्य से खिलवाड़  न करें व सभी युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ही नियम बनाने का फैसला लिया जाए।

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