अद्भुत साहस:समाज से विषमता व भेदभाव समाप्त करने को आगे आई महिलाएं

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यमुना टाइम्स का मातृ शक्ति को प्रणाम :जाति पाती के नाम पर अक्सर राजनीतिक दल अपनी रोटियां सेकते रहते हैं लेकिन आज मातृशक्ति ने ऐसी अद्भुत और साहसिक पहल की जिसे युवाओं युगांतर तक याद किया जाएगा महिलाओं ने समाज से विषमता व भेदभाव समाप्त करने का लिया संकल्प।

रिपोर्ट:राकेश भारतीय
रिपोर्ट :राकेश भारतीय

 

 

समाज से विषमता व भेदभाव समाप्त करना हम सबका धर्म है – अलका गौरी

– जीएनजी कॉलेज में सामाजिक समरसता महिला सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन

यमुना टाइम्स ब्यूरो
यमुनानगर (राकेश भारतीय ) सामाजिक समरसता मंच की ओर से रविवार को स्थानीय गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज में सामाजिक समरसता महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। सामाजिक समरसता महिला सम्मेलन का विषय ‘समरस परिवार, समरस समाज’ निर्माण में महिलाओं की भूमिका रखा गया था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बाल अधिकार संरक्षण आयोग हरियाणा की चेयरमैन ज्योति बैंदा रही। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता स्वामी विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी एवं हरियाणा-पंजाब की द्वि प्रांत संगठक अलका गौरी ने कहा कि सामाजिक समरसता आचरण का विषय है भाषण का विषय नहीं है, समरसता को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज रूपी पक्षी के दो पंखो के रूप में स्त्री तथा पुरूष है। इन दोनों के सहयोग से ही समरसता को प्राप्त किया जा सकता है।

माता पिता का यह परम कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को अपना कार्य स्वयं करने दे ताकि वह आत्मनिर्भर बने। घर में सभी जाति विरादरी के बंधु भाई -बहन आये उनका सम्मान घर में हो ये भी अपने बच्चों को सिखाये ताकि बचपन से ही बच्चों में समरसता का भाव जागरण हो जाए। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद व डॉ. आंबेडकर दोनों ने ही धर्म को कर्तव्य रूप में समझाया। मेरे कर्तव्य ही मेरा धर्म है।

समाज से विषमता व भेदभाव समाप्त करना हम सबका धर्म है। हम सब एक ईश्वर की संतान है, इस नाते भाई भाई है। एक धरती माता के पुत्र है इसलिए ऊंची जाति, छोटी जाति सब भ्रम है। समरसता मन से मानने से होती है हम दोस्ती जाति देखकर नहीं गुण देखकर करे। रोटी बेटी का व्यवहार अब समाज में होना शुरू हो गया है। जातिगत विषमता समाप्त करने के लिए जो ऊपर है उन्हें झुकना व जो नीचे है उन्हें ऊपर उठना है। ये मन से करना होगा तब समरसता आएगी। बाबा साहब आम्बेडकर ने भी समरसता को बंधुभाव कहा तथा बंधुभाव के बिना समानता संभव नही ये उदघोष किया। इस बंधुभाव को ही समरसता कहते है। उन्होंने बताया कि संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरु जी ने देशभर के धर्मचारियों को उडुपी में एकत्र किया व घोषणा की सभी हिन्दू सहोदर भाई है। कोई भी हिन्दू पतित नहीं है। हिन्दुओ की रक्षा मेरी दीक्षा है। समानता हमारा मंत्र है। मोहन भागवत ने भी कहा कि सभी हिन्दुओ के लिए एक मंदिर, एक कुआं, एक श्मशान हो वो सभी के लिए खुले हो। इन महापुरुषो के शब्दों को अपने जीवन में व्यवहार रूप देकर ही देश में समरसता आएगी।
मुख्यातिथि ज्योति वैंदा ने कहा कि जब हमने अपने महापुरुषों को भी जातियों से जोड़ लिया है ऐसा समय समरसता के लिए चुनोती पूर्ण है सभी महापुरुष सभी के है सभी की पुण्यतिथियां व जयंतियां सब मिलकर मनाए तो समरसता युक्त समाज का निर्माण होगा। वशिष्ठ अतिथि डॉ. मीनू ने कहा कि प्राचीन काल से ही महिला ने बलिदान देकर देश की रक्षा भी की व देश को समरसता युक्त बनाने के लिए परिवार व समाज को जोड़ने में अग्रणी भूमिका निभाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वरिंदर गांधी ने कहा अपने बच्चों को समरसता व अनुसाशन सिखाने के लिये हमें स्वयं अनुशाशन व समरसता के अनुरूप आचरण अपने परिवारों में करना होगा। तब ही हमारे बच्चे हमारी इज्ज़त करेंगे। मंच के संरक्षक मानसिंह ने कहा कि महिलाएं पुरुष की सहयोगी है समरसता का कार्य महिला सहयोग के बिना असंभव है। विशिष्ट अतिथि सरिता रानी ने भी संबोधित किया। अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद डीएवी गर्ल्ज कॉलेज की पूर्व प्राचार्या विभा गुप्ता व मीनू ने किया व मंच संचालन देवकी सिंह ने किया। इस अवसर पर मेयर मदन चौहान, समरसता मंच के प्रान्त सह संयोजक ज्ञान, विभाग संयोजक एडवोकेट सुरेन्द्र, जिला संयोजक सतपाल, सह संयोजक विमल, नगर संयोजक संजीव, मीडिया प्रभारी संजीव ओझा, नीरू चौहान, विभा गुप्ता, सहसंयोजक नीरू, स्वागत समिति सदस्य राजकुमारी, रजनीश बाला अधिवक्ता, कुसुम ओझा, मनीषा, अंजली गोसाई, काजल, प्रीति गर्ग, सीडब्ल्यूडी सदस्य रेणू रानी, मधु शर्मा, सुरेन्द्र वर्मा, सुरेश राणा, नवीन त्यागी आदि उपस्थित रहे।

 

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